तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के होमगार्ड विभाग में एक जिला कमांडेंट की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संबंधित जिला कमांडेंट पर होमगार्ड जवानों का शोषण कर अपने पदस्थ जिले में करोड़ों रुपये की लागत से एक भव्य और आलिशान छात्रावास निर्माण कराने के आरोप लग रहे हैं। इतना ही नहीं, सूत्रों का दावा है कि उक्त अधिकारी द्वारा अन्य स्थानों पर भी छात्रावास निर्माण कार्यों में विशेष रुचि दिखाई जा रही है, जिससे पूरे मामले को लेकर विभाग के भीतर चर्चाओं का बाजार गर्म है।जानकारी के अनुसार होमगार्ड विभाग का मूल उद्देश्य आपदा प्रबंधन, कानून व्यवस्था और जनसेवा में सहयोग करना है, लेकिन आरोप है कि कुछ स्थानों पर जवानों से उनके निर्धारित कार्यों के अलावा निजी और निर्माण संबंधी कार्य भी लिए जा रहे हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल सेवा नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि जवानों के अधिकारों का भी गंभीर हनन माना जाएगा।विभागीय सूत्रों का कहना है कि संबंधित कमांडेंट के पदस्थ होने के बाद जिले में एक अत्याधुनिक छात्रावास का निर्माण कराया गया, जिसकी लागत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। निर्माण कार्य की गुणवत्ता और गति को लेकर भी चर्चाएं हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सीमित संसाधनों वाले विभाग में इतने बड़े निर्माण कार्यों के लिए धन, श्रम और संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया गया और इसकी निगरानी किस स्तर पर हुई?सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्यों के दौरान होमगार्ड जवानों की ड्यूटी और कार्यप्रणाली को लेकर भी कई तरह की शिकायतें सामने आई हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन यदि स्वतंत्र जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी विभाग में निर्माण कार्यों के लिए स्पष्ट निविदा प्रक्रिया, तकनीकी स्वीकृति, वित्तीय मंजूरी और गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य होता है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि संबंधित छात्रावास निर्माण में सभी नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं।सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि एक जिला कमांडेंट के कार्यकाल में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य हुए हैं तो उनकी प्रशासनिक और वित्तीय जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही? क्या विभागीय मुख्यालय को इसकी पूरी जानकारी है? क्या निर्माण कार्यों का तकनीकी ऑडिट कराया गया? और क्या जवानों से उनकी निर्धारित जिम्मेदारियों से अलग कार्य लिए गए?होमगार्ड जवानों के बीच भी इस विषय को लेकर असंतोष की चर्चा है। कई जवानों का मानना है कि उनसे सेवा और अनुशासन के नाम पर ऐसे कार्य कराए जाते हैं जिनका उनकी मूल जिम्मेदारियों से कोई संबंध नहीं होता। हालांकि अधिकांश जवान विभागीय कार्रवाई के भय से खुलकर सामने नहीं आना चाहते।यह मामला केवल एक छात्रावास निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि होमगार्ड विभाग की कार्यप्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और जवानों के हितों से जुड़ा हुआ है। यदि आरोपों में सच्चाई है तो राज्य शासन और विभागीय मुख्यालय को तत्काल उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए। वहीं यदि आरोप निराधार हैं तो तथ्यों को सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करना भी उतना ही आवश्यक है।अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या शासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कराएगा या फिर जवानों के शोषण और निर्माण कार्यों से जुड़े ये आरोप फाइलों में दबकर रह जाएंगे।