विकास नंद/ सर्वव्यापी
सरायपाली विकासखंड के विभिन्न शासकीय कार्यालयों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ बाबुओं (लिपिकीय कर्मचारियों) को लेकर आम नागरिकों के बीच चर्चा और सवालों का दौर तेज हो गया है। लोगों का कहना है कि जहां प्रशासनिक व्यवस्था के तहत एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, एसडीओ तथा अन्य राजपत्रित अधिकारियों का समय-समय पर स्थानांतरण होता रहता है, वहीं कई विभागों में बाबू वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि लंबे समय से एक ही कार्यालय में पदस्थ रहने के कारण कुछ कर्मचारियों का प्रभाव इतना बढ़ जाता है कि विभागीय कार्यों पर उनका अप्रत्यक्ष नियंत्रण स्थापित हो जाता है। इससे आम लोगों को कई बार छोटे-छोटे कार्यों के लिए अनावश्यक परेशानी और कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि शासन द्वारा समय-समय पर स्थानांतरण नीति बनाई जाती है ताकि प्रशासनिक पारदर्शिता बनी रहे और किसी भी कर्मचारी का एक स्थान पर अत्यधिक प्रभाव न बढ़े। इसके बावजूद कई विभागों में ऐसे कर्मचारी मौजूद हैं जो वर्षों से एक ही पद और स्थान पर कार्यरत हैं। इससे लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या स्थानांतरण संबंधी नियम केवल अधिकारियों पर ही लागू होते हैं या फिर बाबुओं के लिए अलग व्यवस्था है।
जानकारों का मानना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता प्रभावित होने की आशंका बढ़ जाती है। शासन की मंशा भी यही रहती है कि समय-समय पर कर्मचारियों का स्थानांतरण कर प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाया जाए।इधर आम नागरिकों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि सरायपाली विकासखंड के विभिन्न कार्यालयों में वर्षों से पदस्थ कर्मचारियों की समीक्षा कर स्थानांतरण नीति के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़ेगी तथा आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।अब देखना यह होगा कि लगातार उठ रहे इन सवालों और मांगों के बीच प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है।
फिलहाल सरायपाली में एक ही चर्चा जोरों पर है—”जब एसडीएम और तहसीलदार बदल सकते हैं, तो वर्षों से जमे बाबू आखिर क्यों नहीं?”आकर्षक शीर्षक सहित समाचार बनाकर दें