सामान्य प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठने लगे सवाल, कर्मचारियों की नाराजगी पहुंची मुख्य सचिव तक।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की कार्यप्रणाली को लेकर कर्मचारी वर्ग में असंतोष लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। विभागीय स्तर पर लिए जा रहे कुछ प्रशासनिक निर्णयों, लंबित प्रकरणों के निराकरण में हो रही देरी तथा कर्मचारियों से जुड़े मामलों में अपेक्षित संवेदनशीलता के अभाव को लेकर विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त करना शुरू कर दिया है। यही कारण है कि बीते कुछ समय से कर्मचारियों की शिकायतें लगातार मुख्य सचिव विकास शील तक पहुंच रही हैं और विभिन्न कर्मचारी संघ अपने-अपने मुद्दों को लेकर ज्ञापन सौंप रहे हैं।विभागीय सूत्रों के अनुसार सामान्य प्रशासन विभाग शासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में से एक माना जाता है, जहां से राज्य की प्रशासनिक नीतियों, स्थानांतरण, सेवा संबंधी नियमों तथा विभिन्न विभागों के समन्वय से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। ऐसे में विभाग की कार्यप्रणाली का सीधा प्रभाव लाखों शासकीय कर्मचारियों और अधिकारियों पर पड़ता है। कर्मचारियों का आरोप है कि कई महत्वपूर्ण मामलों में निर्णय लेने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी हो गई है, जिससे कर्मचारियों की समस्याएं लंबे समय तक लंबित बनी हुई हैं।कर्मचारी संगठनों का कहना है कि सेवा संबंधी कई प्रकरण, पदोन्नति, संविलियन, वेतन विसंगति तथा अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर समयबद्ध निर्णय नहीं होने से कर्मचारियों में निराशा बढ़ रही है। इसी कारण विभिन्न संगठनों द्वारा समय-समय पर शासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। हाल के दिनों में कई कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों ने मुख्य सचिव से मुलाकात कर अपनी समस्याओं और मांगों से अवगत कराया है।प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा है कि सामान्य प्रशासन विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर कर्मचारियों के बीच सकारात्मक संदेश नहीं जा रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि यदि संवाद और समन्वय की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया जाए तो अनेक विवाद एवं असंतोष की स्थिति स्वतः समाप्त हो सकती है। कर्मचारी संगठनों का यह भी कहना है कि शासन और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक मजबूत बना सकता है।सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारियों का मानना है कि किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की सफलता कर्मचारियों के मनोबल पर निर्भर करती है। यदि कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान नहीं होता है तो उसका प्रभाव शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी पड़ सकता है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन लगातार शासन के उच्च स्तर तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।अब निगाहें मुख्य सचिव स्तर पर होने वाली आगामी समीक्षा बैठकों और प्रशासनिक निर्णयों पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि उनकी मांगों और शिकायतों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा सामान्य प्रशासन विभाग की कार्यप्रणाली में आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों और शासन के बीच बढ़ती दूरी कम होने के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था में भी सकारात्मक संदेश जाएगा।


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