विकास नंद/सर्वव्यापी

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर वन परिक्षेत्र सरायपाली अंतर्गत परिवृत सिंघोड़ा द्वारा हाई स्कूल सिंघोड़ा में पर्यावरण संरक्षण एवं जनजागरूकता को लेकर भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान विद्यार्थियों, जनप्रतिनिधियों, वन विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा ग्रामीणों की सहभागिता से एक विशाल जागरूकता रैली निकाली गई, जिसने पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण का संदेश प्रसारित किया।रैली में शामिल छात्र-छात्राएं हाथों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित तख्तियां और बैनर लेकर चल रहे थे। “पेड़ लगाओ-जीवन बचाओ”, “हरियाली ही खुशहाली है”, “पर्यावरण बचाओ, भविष्य संवारो” जैसे नारों से पूरा वातावरण गूंज उठा। रैली वन विभाग कार्यालय परिसर से प्रारंभ होकर आसपास के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए लोगों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व से अवगत कराया गया।
रैली के पश्चात हाई स्कूल सिंघोड़ा परिसर में मिश्रित फलदार प्रजातियों के पौधों का वृक्षारोपण किया गया। आम, जामुन, अमरूद एवं अन्य उपयोगी प्रजातियों के पौधे लगाकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित वातावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लिया गया। उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने स्वयं पौधारोपण कर लोगों को अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में प्रकाश पटेल के प्रतिनिधि तन्मय पण्डा, ग्राम पंचायत सिंघोड़ा के सरपंच प्रतिनिधि, जनपद सदस्य रुसबो बरिहा, वन परिक्षेत्र अधिकारी प्रत्युष कुमार तांडे, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी योगेश्वर कर, सहायक परिक्षेत्र अधिकारी योगेश्वर निषाद सहित वन विभाग के अन्य कर्मचारी, सुरक्षा श्रमिक, शिक्षकगण, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और घटते वन क्षेत्र पूरी मानवता के लिए चिंता का विषय हैं। ऐसे में प्रत्येक नागरिक का दायित्व है कि वह पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाए। एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करना प्रकृति के प्रति हमारी सच्ची सेवा है।कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और स्वच्छता बनाए रखने की शपथ ली।
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह भव्य रैली एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में सफल रहा, बल्कि लोगों के मन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव भी जागृत कर गया।