विकास नंद/सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं सदस्य सरला कोसरिया ने सोमवार को रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में महिला उत्पीड़न से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान कई मामलों में आयोग ने समझाइश देकर समाधान कराया, वहीं गंभीर मामलों में जांच एवं एफआईआर की कार्रवाई के निर्देश भी दिए।सुनवाई के दौरान एक मामले में आवेदिका ने बताया कि उसने प्रेम विवाह किया था, लेकिन पिछले लगभग 11 माह से दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। आवेदिका के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज उसके पति के पास हैं और वह उन्हें वापस लेने के साथ आपसी सहमति से तलाक चाहती है। आयोग की समझाइश के बाद अनावेदक दस्तावेज लौटाने के लिए तैयार हो गया। आयोग ने स्पष्ट किया कि यदि दस्तावेज वापस नहीं किए जाते हैं तो आवेदिका संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा सकती है।एक अन्य मामले में महिला ने शिकायत की कि सुलह के बाद दो वर्षों से साथ रहने के बावजूद उसका पति नशे की हालत में उसे लगातार प्रताड़ित करता है। आयोग ने दोनों पक्षों को समझाइश देते हुए नियमित काउंसलिंग कराने का निर्णय लिया। साथ ही महिला को आवश्यकता पड़ने पर एफआईआर दर्ज कराने का अधिकार बताया गया। इस स्तर पर प्रकरण का निराकरण कर उसे नस्तीबद्ध कर दिया गया।
चरित्र हनन और अश्लील गाली-गलौज से जुड़े एक मामले में शिकायतकर्ता महिला ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से उसकी छवि खराब करने का प्रयास किया। सुनवाई के दौरान आरोपियों ने खेद व्यक्त किया। आयोग की समझाइश के बाद मामला सुलझ गया और प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान शासकीय नवीन महाविद्यालय नवागांव के सहायक प्राध्यापकों से जुड़ा एक गंभीर मामला भी सामने आया। महिला सहायक प्राध्यापकों ने आरोप लगाया कि एक पुरुष प्राध्यापक उनके साथ अभद्र व्यवहार करता है, धमकियां देता है तथा छात्रों के सामने उनका अपमान करता है। शिकायत में यह भी कहा गया कि छात्रों को अंक काटने की धमकी देकर दबाव बनाया जाता है। दूसरी ओर संबंधित प्राध्यापक ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कुछ महिला प्राध्यापक उनके खिलाफ संगठित रूप से शिकायत कर रही हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने इसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न का मामला माना और कॉलेज प्रशासन को जांच के निर्देश दिए। महिला प्राध्यापकों ने जांच समिति की निष्पक्षता पर सवाल उठाए, जिसके बाद आयोग ने अपनी सहायक संचालिका को आंतरिक समिति की जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए नियुक्त किया।
आयोग ने निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर जांच समिति की बैठक आयोजित कर दोनों पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए तथा 15 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।एक अन्य मामले में ग्राम पंचायत की सरपंच और उपसरपंच के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद पर सुनवाई हुई। दोनों पक्ष एक-दूसरे के खिलाफ लगातार शिकायतें कर रहे थे। आयोग की समझाइश के बाद दोनों पक्ष आपसी सुलह के लिए तैयार हो गए, जिसके बाद मामले का निपटारा कर उसे नस्तीबद्ध कर दिया गया।
महिला आयोग ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में त्वरित न्याय, निष्पक्ष जांच और संवाद के माध्यम से समाधान सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।