बिहार तिहार से मुख्यमंत्री साय ने कर दिया छत्तीसगढ़ में बिहारी राज का आगाज… तिरीथ कुमारी।

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सरायपाली/विकास नंद/ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव एवं कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग की प्रदेश समन्वयक तिरीथ कुमारी ने साय सरकार द्वारा मनाए जा रहे बिहार तिहार पर तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस की भूपेश सरकार ने छत्तीसगढ़िया संस्कृति और परंपरा को बढ़ावा देने के लिए बहुत सारे काम किये थे परंतु छत्तीसगढ़ियों के लिए बड़े ही शर्म की बात है कि आज छत्तीसगढ़ राज्य को बने 25 वर्ष हो चुके हैं लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य में अब तक स्थानीय छत्तीसगढ़ी भाषा में सरकारी कामकाज की बात दूर हम खुद इस भाषा में लिखा पढ़ी नहीं कर रहे हैं और आज छत्तीसगढ़ राज्य में दूसरे राज्य का स्थापना दिवस सत्तारूढ़ भाजपा सरकार मना रही हैं, किस से यह छत्तीसगढ़ियों का अस्तित्व खत्म करने की रणनीति परदेशिया बना रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के भाजपा संगठन रायपुर द्वारा कल 22 मार्च को छत्तीसगढ़ राज्य में बिहार स्थापना दिवस ,बिहार के तिहार के रुप में मनाने के लिए भाजपा द्वारा आमंत्रण पत्र बंटवाया गया है जिसमें प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव से लेकर भाजपा सरकार के मंत्री और विधायक अतिथि के रुप में शामिल होने जा रहा है। इस आमंत्रण पत्र को सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोग तरह तरह की बातें कर रहे हैं । निश्चित रुप से हमारे छत्तीसगढ राज्य में विभिन्न प्रांतों के लोग निवास करते हैं जो अपनी संस्कृति, त्यौहारों को यहां पर रहकर मनाते दिखाई पड़ जाते हैं लेकिन पहली बार छत्तीसगढ़ राज्य में दूसरे प्रदेश का स्थापना दिवस मनाने की खबर सामने आई है,जो निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ियों के लिए चिंतन करने का सबसे बड़ा दिन है कि आज दूसरे प्रदेश के रहवासी छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस नहीं मनाते हैं और न ही छत्तीसगढ़िया लोग जो दूसरे प्रदेश में रहते हैं ,वह अपने राज्य की स्थापना दिवस नहीं मनाते हैं लेकिन आज भाजपा सरकार मंत्री, विधायकों द्वारा छत्तीसगढ़िया होने के बाद भी छत्तीसगढ़ में बिहार राज्य का स्थापना दिवस छत्तीसगढ़ में मनाने को लेकर अपनी सहमति अतिथियों के रूप में दिया है। जिससे यह कहना गलत नहीं होगा कि हम छत्तीसगढ़िया अपने अस्तित्व को कायम रखने के लिए एकजुटता का परिचय नहीं देते हैं तो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ निश्चित रूप से बिहार राज्य के रुप में तब्दील हो जाएगी,यह हम नहीं बल्कि विद्वानों का मानना है।आगे तिरीथ ने कहा कि इस दिशा में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के पूर्व अध्यक्षों को जो वर्तमान में अध्यक्ष पद के दावेदार हैं उनका इस दिशा में मौन रहना,यही साबित करता है कि छत्तीसगढ़ के कुछ सफेदपोश नेता और अपने आप को छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए पूर्ण रूप से समर्पित होने की बात कहने वाले लोग सिर्फ अपना पद प्रतिष्ठा बचाने के सिवाए छत्तीसगढ़ियों और छत्तीसगढ़ी भाषा के विकास को लेकर कुछ नहीं करने वाले..! फिलहाल छत्तीसगढ़ राज्य में कल बिहार राज्य स्थापना दिवस मनाने को छत्तीसगढ़ राज्य में बिहारी राज का आगाज होना आंका जाने लगा है। आगे तिरीथ ने कहा अब देखना यह है कि हम छत्तीसगढ़िया क्या छत्तीसगढ़ में बंधुआ मजदूर बनकर गैर छत्तीसगढ़िया के सामने गुलाम बनकर रह जाएंगे या फिर अपने अस्तित्व कायम करने के लिए अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी को दुनिया में पहचान दिलाने के लिए कार्य करेंगे..!


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