नूर मोहम्मद ,गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही (सर्वव्यापी)
छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा सरकारी विद्यालयों में सरस्वती वंदना एवं विभिन्न मंत्रों के जाप को अनिवार्य किए जाने के आदेश के खिलाफ अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में जिला मुस्लिम विकास मंच ने इस फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। विरोध प्रदर्शन की शुरुआत गौरेला स्थित धरना स्थल लाल बंगला से हुई, जहां बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग एकत्रित हुए। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में काली पट्टी बांधकर शासन के आदेश के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। इसके बाद मंच विकास मंच के सदस्य लाल बंगला से कलेक्टर कार्यालय तक मौन रैली के रूप में पहुंचे। रैली के दौरान प्रदर्शनकारियों ने संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा और सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान बनाए रखने की मांग उठाई। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर मंच के प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान, संस्कार और समान अवसर प्रदान करना है, न कि किसी विशेष धार्मिक परंपरा को अनिवार्य बनाना। मंच का आरोप है कि सरकारी विद्यालयों में एक धर्म विशेष से जुड़े मंत्रों और वंदनाओं को अनिवार्य करना संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना तथा नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।”सरकारी स्कूल किसी धर्म विशेष के प्रचार का मंच नहीं” मुस्लिम विकास मंच के अध्यक्ष असद सिद्दीकी ने ज्ञापन में कहा है कि सरकारी विद्यालय सभी वर्गों और समुदायों के बच्चों के लिए समान रूप से संचालित होते हैं। ऐसे में किसी एक धार्मिक परंपरा को अनिवार्य बनाना संविधान की मूल भावना के विपरीत माना जा सकता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 25, 28, 14 एवं 15 का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी आस्था के अनुसार जीवन जीने और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि राज्य से पूर्णतः वित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में धार्मिक गतिविधियों की अनिवार्यता को लेकर संवैधानिक प्रश्न खड़े हो सकते हैं और यह विषय व्यापक सार्वजनिक विमर्श की मांग करता है।राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग मुस्लिम विकास मंच ने राज्यपाल से आग्रह किया है कि 12 जून 2026 को जारी आदेश की समीक्षा कर राज्य शासन को इसे वापस लेने के निर्देश दिए जाएं, ताकि सभी धर्मों और समुदायों के विद्यार्थियों के अधिकार सुरक्षित रह सकें तथा शिक्षा व्यवस्था की धर्मनिरपेक्ष प्रकृति बनी रहे। जिले से उठी आवाज, प्रदेशभर में छिड़ सकती है बहसज्ञापन सौंपे जाने के बाद यह मुद्दा जिले में चर्चा का विषय बन गया है। शिक्षा, संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े इस मामले पर विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों के बीच बहस शुरू हो गई है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस आदेश को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।अब शासन के फैसले पर टिकी निगाहेंमुस्लिम विकास मंच ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल उन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आपत्ति दर्ज कराई है, लेकिन यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आगे व्यापक आंदोलन और कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जाएगा। ऐसे में अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि राज्य सरकार और प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सहित अन्य संबंधित अधिकारियों को भी प्रेषित की गई है।