तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

जशपुर जिले के विभिन्न नगरीय निकायों में एल्डरमैन नियुक्तियों की सूची जारी होने के बाद भारतीय जनता पार्टी के भीतर ही असंतोष और विवाद की स्थिति निर्मित होती दिखाई दे रही है। विशेष रूप से जिले के बगीचा नगर पंचायत क्षेत्र में एल्डरमैन नियुक्ति को लेकर पार्टी नेताओं के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर हुई बातचीत चर्चा का विषय बन गई है।जानकारी के अनुसार, जैसे ही एल्डरमैन नियुक्ति की सूची सामने आई और उसमें लोकनाथ यादव, सुनीता शर्मा एवं हरिशंकर पैंकरा के नाम शामिल पाए गए, भाजपा के एक मंडल स्तरीय व्हाट्सएप ग्रुप में इस विषय पर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। इसी दौरान बगीचा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष एवं भाजपा नेता अरविंद गुप्ता द्वारा ग्रुप में एक टिप्पणी की गई, जिसमें उन्होंने “5 लाख वाला जो भी हो” लिखते हुए अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।अरविंद गुप्ता की इस टिप्पणी के बाद ग्रुप में कई सदस्यों ने आपत्ति दर्ज कराई और आरोपों की पुष्टि करने की मांग की। भाजपा के एक जिला पदाधिकारी ने जवाब देते हुए कहा कि यदि इस प्रकार के आरोप लगाए जा रहे हैं तो उन्हें प्रमाणित किया जाना चाहिए, अन्यथा कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।इसके बाद ग्रुप में अन्य सदस्यों ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही सार्वजनिक टिप्पणी करनी चाहिए। कुछ सदस्यों ने यह भी लिखा कि संगठन द्वारा नियुक्तियां योग्यता और संगठनात्मक मानदंडों के आधार पर की गई होंगी, इसलिए बिना प्रमाण के आरोप उचित नहीं हैं।हालांकि विवाद यहीं नहीं थमा। आरोपों पर सफाई देते हुए अरविंद गुप्ता ने ग्रुप में लिखा कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगाया है, बल्कि जो बातें आम चर्चा और बाजार में सुनने को मिल रही हैं, उसी संदर्भ में अपनी बात रखी है।व्हाट्सएप ग्रुप में हुई इस बातचीत के स्क्रीनशॉट अब राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तेजी से वायरल हो रहे हैं। इसके बाद एल्डरमैन नियुक्तियों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि अब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी या संगठनात्मक स्तर पर इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी पक्ष द्वारा कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक किया गया है।फिलहाल पूरा मामला राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। पार्टी के भीतर भी कई कार्यकर्ता यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी, जबकि संगठन ने नियुक्तियों की प्रक्रिया को लेकर कोई सार्वजनिक विवाद सामने नहीं आने दिया था।महत्वपूर्ण यह है कि सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों की सत्यता की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो सकी है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने और किसी जांच या स्पष्टीकरण के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। समाचार में उल्लेखित आरोप व्हाट्सएप ग्रुप में हुई कथित बातचीत पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फोटो कैप्शन: भाजपा के व्हाट्सएप ग्रुप में एल्डरमैन नियुक्ति को लेकर हुई बातचीत का वायरल स्क्रीनशॉट, जिसमें आरोप-प्रत्यारोप का दौर देखा जा सकता है।