हिंदी विश्वविद्यालय और उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय मिलकर तैयार करेंगे भविष्य की शिक्षा का मॉडल… समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप उच्च शिक्षा में गुणवत्ता, नवाचार और डिजिटल शिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र और उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय ने शनिवार, 27 जून को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक समझौता किया। इस समझौते के तहत दोनों विश्वविद्यालय शोध, दूरस्थ एवं मुक्त शिक्षा, ऑनलाइन पाठ्यक्रम, संकाय एवं छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त शैक्षणिक गतिविधियों तथा पाठ्यक्रम विकास के क्षेत्र में मिलकर कार्य करेंगे।समारोह में दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने हस्ताक्षरित समझौता-पत्रों का आदान-प्रदान किया। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि यह समझौता ज्ञापन केवल दो विश्वविद्यालयों के बीच सहयोग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को व्यवहार में उतारने की एक ठोस पहल है। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थान अपनी शैक्षणिक विशेषज्ञता, मानव संसाधन और बौद्धिक संपदा को साझा करते हुए विद्यार्थियों को अधिक गुणवत्तापूर्ण और समकालीन शिक्षा उपलब्ध कराएंगे। समय की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रमों में नवाचार भी किया जाएगा।उन्होंने कहा कि हिंदी विश्वविद्यालय ने दूरस्थ एवं मुक्त शिक्षा, हिंदी, अनुवाद अध्ययन तथा आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण के क्षेत्र में मजबूत पहचान बनाई है। इस साझेदारी से दोनों विश्वविद्यालय एक-दूसरे की विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए शिक्षा और शोध को नई दिशा देंगे। प्रो.शर्मा ने बताया कि हिंदी विश्वविद्यालय ने ऑनलाइन शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। अब दोनों संस्थानों के शिक्षक और शोधकर्ता संयुक्त रूप से शोध परियोजनाओं, डिजिटल पाठ्यक्रमों और अकादमिक नवाचार पर कार्य करेंगे। इससे विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के मार्गदर्शन, साझा शिक्षण संसाधनों और उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययन-अवसरों का लाभ मिलेगा।


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