तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही के अंतर्गत आने वाले मरवाही वनमंडल में संचालित ग्रीन क्रेडिट योजना एवं कैम्पा योजना के अंतर्गत पौधा तैयार करने और रोपण कार्यों में गंभीर प्रशासनिक एवं वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। अरण्य भवन, नवा रायपुर से गठित जांच दल द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन में अभिलेखों के संधारण, सामग्री क्रय, पौधों के उपयोग तथा व्यय लेखांकन को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां दर्ज की गई हैं।जांच दल के अनुसार, मरवाही परिक्षेत्र की छिचगोहना रोपणी एवं खोडरी परिक्षेत्र की सधवानी रोपणी में पौधा तैयारी से संबंधित अभिलेखों का संधारण व्यवस्थित रूप से नहीं किया गया। प्रतिवेदन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2022-23 से छिचगोहना रोपणी प्रबंधन समिति कार्यरत नहीं है, जिसके कारण इस समिति द्वारा उसके बाद पौधा तैयारी का कोई कार्य नहीं किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि समिति द्वारा पूर्व में तैयार किए गए पौधों का उपयोग ग्रीन क्रेडिट योजना एवं कैम्पा योजना के वृक्षारोपण क्षेत्रों में नहीं किया गया, बल्कि इन योजनाओं के लिए विभागीय स्तर पर पौधे तैयार किए गए।जांच दल ने यह भी पाया कि रोपण कार्यों में उपयोग की गई कई सामग्रियां, जिनमें पॉलीथीन बैग, रेत, गोबर खाद, उपजाऊ मिट्टी एवं बोनमिल शामिल हैं, उनकी प्राप्ति कार्यादेश जारी होने से पूर्व ही दर्ज की गई थी। इसे प्रक्रियागत अनियमितता के रूप में देखा गया है।प्रतिवेदन के अनुसार, मनरेगा मद के अंतर्गत तैयार पौधों में से 59 हजार पौधों को बड़े आकार के पॉलीथीन बैग में स्थानांतरित कर ग्रीन क्रेडिट योजना एवं कैम्पा योजना के रोपण क्षेत्रों में उपयोग किया गया। बाद में इनकी पूर्ति ग्रीन क्रेडिट एवं कैम्पा योजना से तैयार पौधों के माध्यम से की गई। जांच दल ने उल्लेख किया है कि वर्तमान में छिचगोहना रोपणी में मनरेगा मद के उक्त पौधे उपलब्ध हैं।जांच में यह भी सामने आया कि अन्य वनमंडलों से प्राप्त 63,166 पौधों के लिए 10 लाख 96 हजार 437 रुपये के भुगतान का प्रस्ताव रोपणी घटक की अवशेष राशि 40 लाख 58 हजार 424 रुपये से किया जाना प्रस्तावित है।सधवानी रोपणी में ग्रीन क्रेडिट योजना मद के अंतर्गत 1,31,560 पौधों के लिए 30×45 सेंटीमीटर आकार के पॉलीथीन बैगों की भराई एवं पॉटिंग मिश्रण तैयार करने पर मई 2025 में 19 लाख 94 हजार 388 रुपये का व्यय लेखाबद्ध किया गया। जांच दल ने पाया कि इसी कार्य के लिए अक्टूबर 2025 में पुनः 18 लाख 63 हजार 714 रुपये का व्यय दर्ज किया गया, जिसे एक ही कार्य पर दोबारा व्यय दर्शाए जाने के कारण अनियमित बताया गया है।इसके अतिरिक्त, सधवानी रोपणी में वर्ष 2025 के लिए 104 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण एवं मृत पौध प्रतिस्थापन हेतु 1,31,560 टाल प्लांट तैयार किए जाने थे। जांच में पाया गया कि 15×25 सेंटीमीटर आकार के पॉलीथीन बैग, उपजाऊ मिट्टी, रेत और गोबर खाद आदि सामग्री की खरीदी पर 9 लाख 66 हजार 917 रुपये खर्च किए गए, किंतु उनके वास्तविक उपयोग की पुष्टि नहीं हो सकी। जांच दल ने इसे संभावित निरर्थक व्यय की श्रेणी में माना है।इसी प्रकार, छिचगोहना रोपणी में 111 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 1,40,415 टाल प्लांट तैयार किए जाने थे। यहां भी पौधा तैयारी के लिए पॉलीथीन बैग तथा अन्य सामग्री की खरीदी पर 9 लाख 89 हजार 276 रुपये व्यय किए गए, लेकिन जांच के दौरान इन सामग्रियों के उपयोग की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी। जांच दल ने इस व्यय को भी निरर्थक व्यय की श्रेणी में रखा है।यह जांच प्रतिवेदन अरण्य भवन, नवा रायपुर के विषय विशेषज्ञ एवं सदस्य सचिव डी.के.एस. मौर्य, जैव विविधता बोर्ड के सहायक वन संरक्षक पुष्पेन्द्र कुमार साहू तथा वन संरक्षक (भू-प्रबंध/वन संरक्षण एवं अनुसंधान) गुरुनाथन एन. द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है। प्रतिवेदन के साथ कुल 77 पृष्ठों के दस्तावेजी प्रदर्श संलग्न किए गए हैं।अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच प्रतिवेदन में दर्ज इन टिप्पणियों और अनियमितताओं के संबंध में संबंधित विभाग द्वारा आगे क्या प्रशासनिक कार्रवाई की जाती