विकास नंद/सर्वव्यापी
संभावित अल-नीनो के प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए सतर्क रहने की अपील की है। विभाग ने आशंका जताई है कि मानसून में देरी, लंबे समय तक वर्षा का अंतराल तथा बारिश का मौसम समय से पहले समाप्त होने जैसी परिस्थितियों का खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इन्हीं संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य में विशेष आकस्मिक कार्ययोजना लागू की गई है।कृषि विभाग के अनुसार इस कार्ययोजना का मुख्य उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, कम पानी वाली फसलों का रकबा बढ़ाना, जल संरक्षण को प्रोत्साहित करना तथा आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से सीमित संसाधनों में भी बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना है। किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली और कम पानी की आवश्यकता वाली धान की उन्नत किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है।विभाग ने बताया कि टिकरा एवं भर्री जैसी ऊंची और ढलान वाली भूमि में समय पर बुआई के साथ नमी संरक्षण के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) पद्धति अपनाना लाभकारी रहेगा। किसानों से केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय फसल विविधीकरण अपनाने की अपील की गई है। इसके तहत अरहर, मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों के साथ तिल, सोयाबीन और मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों की खेती को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है।खेतों में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग (भूमि आच्छादन) तकनीक अपनाने, मेड़बंदी को मजबूत करने तथा वर्षा जल संरक्षण के स्थानीय और पारंपरिक उपायों को पुनर्जीवित करने पर भी जोर दिया गया है। विभाग का कहना है कि इन उपायों से वाष्पीकरण कम होगा और उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।कृषि विभाग ने किसानों से प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक नुकसान से बचाव के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने की अपील की है। साथ ही खेती के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या या मौसम संबंधी कठिनाई आने पर निकटतम कृषि विभाग के अधिकारियों से तत्काल संपर्क कर आवश्यक मार्गदर्शन लेने की सलाह दी गई है।


