तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी
सरकारी कार्यालयों की चर्चा अक्सर फाइलों, नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं तक सीमित रह जाती है। लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं, जो अपने पद से नहीं बल्कि अपने व्यवहार, कार्यशैली और मानवीय मूल्यों से पहचान बनाते हैं। छत्तीसगढ़ मंत्रालय, महानदी भवन में खेल एवं युवा कल्याण विभाग में कार्यरत निज सचिव भैरव नाथ विश्वकर्मा और स्टाफ ऑफिसर सतीश सिंह ठाकुर ऐसे ही दो नाम हैं, जिनकी मित्रता, सादगी और कार्य के प्रति समर्पण मंत्रालय में वर्षों से एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखे जाते हैं।संयोग भी कितना सुंदर है कि दोनों मित्रों का जन्मदिन 10 जुलाई को पड़ता है। यह केवल तिथि का मेल नहीं, बल्कि उन दो व्यक्तित्वों का भी संगम है, जिन्होंने वर्षों से एक-दूसरे के साथ कार्य करते हुए यह सिद्ध किया है कि सच्ची मित्रता पद, प्रतिष्ठा और परिस्थितियों से कहीं ऊपर होती है।मंत्रालय के कर्मचारी बताते हैं कि दोनों अधिकारियों का स्वभाव अत्यंत सरल, सहज और सहयोगात्मक है। किसी भी कर्मचारी, आगंतुक अथवा जनप्रतिनिधि के प्रति उनका व्यवहार विनम्र और सम्मानपूर्ण रहता है। यही कारण है कि वे केवल अपने विभाग तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे मंत्रालय में सम्मान और स्नेह के पात्र हैं।इन दोनों की एक और विशेषता उन्हें अलग पहचान देती है—छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के प्रति उनका आत्मीय लगाव। प्रशासनिक वातावरण में जहाँ अक्सर औपचारिक भाषा का बोलबाला रहता है, वहीं भैरव नाथ विश्वकर्मा और सतीश सिंह ठाकुर सहज रूप से छत्तीसगढ़ी में संवाद कर अपनी मातृभूमि की संस्कृति से जुड़े रहने का संदेश देते हैं। उनकी यह आत्मीयता बताती है कि अपनी भाषा से प्रेम करना केवल भावनात्मक विषय नहीं, बल्कि अपनी पहचान और संस्कृति को सम्मान देने का माध्यम भी है।वर्तमान समय में, जब कार्यस्थलों पर प्रतिस्पर्धा, तनाव और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएँ रिश्तों पर भारी पड़ती दिखाई देती हैं, तब इन दोनों की मित्रता यह संदेश देती है कि सहयोग, विश्वास और पारस्परिक सम्मान किसी भी संस्थान की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। वर्षों तक साथ काम करने के बाद भी उनके संबंधों में वही आत्मीयता और अपनापन दिखाई देता है, जो नए सहकर्मियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाता है।मित्रता का वास्तविक अर्थ केवल साथ बैठना या साथ काम करना नहीं, बल्कि सुख-दुख में एक-दूसरे का संबल बनना, कार्य की चुनौतियों को मिलकर स्वीकार करना और संगठन के हित को सर्वोपरि रखना है। भैरव नाथ विश्वकर्मा और सतीश सिंह ठाकुर की कार्यशैली इसी भावना को जीवंत करती है।10 जुलाई का दिन इन दोनों के लिए केवल जन्मदिन नहीं, बल्कि उन मानवीय मूल्यों का उत्सव भी है जिनकी आज समाज और प्रशासन दोनों को सबसे अधिक आवश्यकता है। ऐसे व्यक्तित्व यह विश्वास जगाते हैं कि सरकारी व्यवस्था में संवेदनशीलता, सरलता और मानवीय व्यवहार आज भी जीवित हैं।सर्वव्यापी परिवार की ओर से खेल एवं युवा कल्याण विभाग के निज सचिव भैरव नाथ विश्वकर्मा एवं स्टाफ ऑफिसर सतीश सिंह ठाकुर को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। ईश्वर उन्हें उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, निरंतर सफलता और जनसेवा का यही भाव बनाए रखने की शक्ति प्रदान करें। उनकी मित्रता आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी रहे।


