विकास नंद / सर्वव्यापी
पत्रकारिता केवल समाचार लिखने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जवाबदेही निभाने का एक सतत दायित्व है। जब पत्रकार सत्ता, व्यवस्था और समाज के बीच खड़े होकर निष्पक्षता, निर्भीकता और जनसरोकारों को अपनी प्राथमिकता बनाता है, तभी उसकी कलम एक मिशन का स्वरूप ग्रहण करती है। ऐसे ही पत्रकारों में एक नाम है तरुण कौशिक, जिन्होंने अपने जीवन के 42वें वर्ष में प्रवेश करते हुए पत्रकारिता, साहित्य और छत्तीसगढ़ी भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहचान बनाई है।छत्तीसगढ़ के एकमात्र निर्भीक, निष्पक्ष, नियमित बहुरंगी साप्ताहिक समाचार पत्र “सर्वव्यापी” तथा सर्वव्यापी वेबपोर्टल के प्रधान संपादक के रूप में तरुण कौशिक पिछले 26 वर्षों से जनसरोकारों की पत्रकारिता कर रहे हैं। उनकी पहचान किसी राजनीतिक विचारधारा के प्रचारक के रूप में नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ को प्रमुखता से उठाने वाले पत्रकार के रूप में स्थापित हुई है। उन्होंने भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, वन, राजस्व, पंचायत, नगरीय निकायों तथा सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक विषयों पर लगातार बेबाकी से लेखन किया है।पत्रकारिता के साथ-साथ तरुण कौशिक ने साहित्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा में 20 स्वलिखित पुस्तकों की रचना कर मातृभाषा के संरक्षण और विकास का उल्लेखनीय प्रयास किया है। उनकी रचनाओं में छत्तीसगढ़ की संस्कृति, लोकजीवन, सामाजिक चेतना और क्षेत्रीय अस्मिता की स्पष्ट झलक दिखाई देती है। वे लगातार छत्तीसगढ़ी भाषा में संपादकीय और विचारोत्तेजक आलेख लिखते रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी में अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान और अपनत्व की भावना मजबूत होती है।पत्रकारिता का उनका सफर भी संघर्षों से भरा रहा है। उन्होंने प्रतिष्ठित समाचार पत्र दैनिक डिसेंट, रायपुर में लगभग 20 वर्षों तक नगर संवाददाता से लेकर प्रदेश कार्यकारी संपादक तक विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। इस लंबे कार्यकाल ने उन्हें जमीनी पत्रकारिता की गहरी समझ प्रदान की। वे दैनिक डिसेंट के संस्थापक संपादक स्वर्गीय सी. के. त्रिवेदी को अपना गुरु मानते हैं और स्वीकार करते हैं कि निर्भीक, निष्पक्ष और जनपक्षधर पत्रकारिता की प्रेरणा उन्हें उन्हीं से मिली। आज भी उनकी पत्रकारिता में उसी बेबाक शैली की झलक दिखाई देती है।समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी भी तरुण कौशिक की विशेष पहचान रही है। वे अनेक सामाजिक एवं पत्रकार संगठनों से जुड़े हुए हैं। छत्तीसगढ़िया एकता मंच के संस्थापक प्रदेशाध्यक्ष के रूप में उन्होंने छत्तीसगढ़ की भाषा, संस्कृति और सामाजिक एकता के लिए लगातार कार्य किया है। वहीं लगभग छह महीने पूर्व उन्हें ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ का प्रदेश महासचिव नियुक्त किया गया, जहाँ वे पत्रकारों के अधिकारों, संगठनात्मक मजबूती और निष्पक्ष पत्रकारिता के पक्ष में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।तरुण कौशिक का मानना है कि पत्रकारिता का वास्तविक उद्देश्य केवल सूचना देना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में जनमत तैयार करना भी है। यही कारण है कि उनके समाचारों और संपादकीयों में जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही का आग्रह प्रमुखता से दिखाई देता है। वे मानते हैं कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता अनिवार्य है।अपने लंबे पत्रकारिता जीवन में उन्हें विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ-साथ अनेक पूर्व मंत्रियों द्वारा भी सम्मानित किया जा चुका है। हालांकि वे स्वयं सम्मान से अधिक अपनी कलम की विश्वसनीयता और पाठकों के विश्वास को सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। यही विश्वास उन्हें निरंतर नई ऊर्जा के साथ जनहित के मुद्दे उठाने के लिए प्रेरित करता है।आज जब पत्रकारिता अनेक चुनौतियों के दौर से गुजर रही है, ऐसे समय में तरुण कौशिक जैसे पत्रकार यह संदेश देते हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि नीयत साफ हो और उद्देश्य जनहित हो, तो पत्रकारिता समाज में सकारात्मक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन सकती है।अपने 42वें जन्मदिवस पर तरुण कौशिक के जीवन का यह पड़ाव केवल व्यक्तिगत उपलब्धि का अवसर नहीं, बल्कि उस संघर्ष, समर्पण और निरंतरता का भी प्रतीक है, जो उन्होंने पत्रकारिता, साहित्य और छत्तीसगढ़ी भाषा की सेवा के लिए समर्पित किया है। उनके शुभचिंतक, पाठक, साहित्यकार, पत्रकार साथी और सामाजिक कार्यकर्ता उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सफल जीवन की कामना कर रहे हैं।जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ।ईश्वर से प्रार्थना है कि आपकी कलम सदैव सत्य, निष्पक्षता और जनहित की आवाज़ बनकर समाज का मार्गदर्शन करती रहे तथा आप स्वस्थ, दीर्घायु और निरंतर नई ऊँचाइयों को प्राप्त करें।


