तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार एक ओर शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए ई-ऑफिस, ऑनलाइन फाइल प्रणाली तथा डिजिटल हस्ताक्षर (Digital Signature) को अनिवार्य बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है, वहीं दूसरी ओर स्कूल शिक्षा विभाग से जारी एक कथित ऑफलाइन स्थानांतरण आदेश ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।3 जुलाई 2026 को मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आदेश क्रमांक ESTB-1/3410/2026/20-3 में व्याख्याता (गणित) सोनाली श्रीवास्तव को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय हरदीकला (टोना), जिला बिलासपुर से जे.आर. दानी शासकीय कन्या उच्चतर हिन्दी विद्यालय, रायपुर में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ करने का उल्लेख किया गया है।लेकिन इस आदेश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ऑफलाइन जारी दस्तावेज प्रतीत होता है। आदेश में कहीं भी डिजिटल हस्ताक्षर, ई-ऑफिस जनरेटेड क्यूआर कोड, ऑनलाइन सत्यापन संख्या अथवा इलेक्ट्रॉनिक प्रमाणीकरण दिखाई नहीं देता। केवल हस्ताक्षर और विभागीय प्रारूप में आदेश जारी किया गया है, जिससे इसकी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।उठ रहे हैं कई अहम सवालजब राज्य सरकार अधिकांश विभागों में ऑनलाइन फाइल प्रणाली लागू कर चुकी है, तब यह आदेश ऑफलाइन क्यों जारी किया गया?क्या यह आदेश ई-ऑफिस प्रणाली से जारी हुआ था या पूरी प्रक्रिया मैनुअल रही?यदि ऑफलाइन जारी हुआ, तो इसके पीछे प्रशासनिक कारण क्या थे?क्या विभाग ने डिजिटल गवर्नेंस के अपने ही मानकों का पालन नहीं किया?क्या भविष्य में ऐसे आदेशों की प्रामाणिकता को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं?पारदर्शिता पर भी उठे प्रश्नप्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल हस्ताक्षरित आदेशों से दस्तावेजों की सत्यता, समय और प्रामाणिकता सुनिश्चित होती है। वहीं ऑफलाइन आदेशों में सत्यापन की प्रक्रिया अपेक्षाकृत कठिन हो जाती है। ऐसे में यदि सरकार स्वयं डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा दे रही है, तो विभागों द्वारा उसी व्यवस्था का पालन किया जाना भी आवश्यक है।विभाग से अपेक्षित स्पष्टीकरणस्कूल शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि—क्या यह आदेश विधिवत ई-ऑफिस प्रणाली से स्वीकृत हुआ था?यदि हां, तो डिजिटल प्रति सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?यदि नहीं, तो डिजिटल शासन की नीति से अलग प्रक्रिया क्यों अपनाई गई?सरकार की मंशा और विभागीय कार्यप्रणाली में अंतर?राज्य सरकार लगातार “पेपरलेस प्रशासन” और “डिजिटल गवर्नेंस” को बढ़ावा देने की बात करती रही है। ऐसे समय में इस प्रकार के ऑफलाइन आदेश विभागीय कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं। यदि वास्तव में आदेश डिजिटल प्रक्रिया से बाहर जारी किया गया है, तो यह शासन की घोषित नीति और विभागीय अमल के बीच अंतर को भी उजागर करता है।


