अस्पताल को लेकर उठे सवाल, क्या नए कलेक्टर के कार्यकाल में होगी निष्पक्ष जांच...?अस्पताल को बचाने किसने ली लाखों रुपए...? - Sarvavyapi अस्पताल को लेकर उठे सवाल, क्या नए कलेक्टर के कार्यकाल में होगी निष्पक्ष जांच...?अस्पताल को बचाने किसने ली लाखों रुपए...? - Sarvavyapi

अस्पताल को लेकर उठे सवाल, क्या नए कलेक्टर के कार्यकाल में होगी निष्पक्ष जांच…?अस्पताल को बचाने किसने ली लाखों रुपए…?

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में एक अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर इन दिनों चर्चाओं का दौर तेज है। विभिन्न सामाजिक और स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि अस्पताल के संचालन, नियमों के पालन तथा प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े सभी मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।इसी बीच जिले के पूर्व कलेक्टर डॉ संतोष कुमार देवांगन के स्थानांतरण के बाद तरह-तरह की अटकलें भी सामने आ रही हैं। हालांकि इन चर्चाओं की किसी सक्षम सरकारी एजेंसी अथवा आधिकारिक दस्तावेज से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन दावों की सत्यता की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि किसी अस्पताल के विरुद्ध पूर्व में शिकायतें प्राप्त हुई थीं, तो उन शिकायतों की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। लोगों का यह भी मानना है कि प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अस्पताल के विरुद्ध किन-किन बिंदुओं पर जांच हुई, क्या कमियां पाई गईं और यदि कोई अनियमितता मिली तो उस पर क्या कार्रवाई की गई।अब जिले में नवपदस्थ कलेक्टर विजय दयाराम के. से लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। जनमानस की मांग है कि वे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) से संबंधित शिकायतों और जांच प्रतिवेदनों की जानकारी प्राप्त कर पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा करें। यदि किसी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो कानून के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, वहीं यदि आरोप निराधार हों तो उसे भी सार्वजनिक किया जाए।जनचर्चाओं के बीच कुछ अपुष्ट आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि प्रभावशाली लोगों के दबाव के कारण कार्रवाई प्रभावित हो सकती है। इन आरोपों का कोई आधिकारिक प्रमाण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है और न ही संबंधित पक्षों की ओर से इसकी पुष्टि हुई है। इसलिए इन दावों को सत्यापित तथ्यों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।जनप्रतिनिधियों, स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि स्वास्थ्य संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और कानून का समान रूप से पालन सुनिश्चित करें। यदि किसी निजी अस्पताल ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप तथ्यहीन हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर जनता का विश्वास भी कायम रखा जाना चाहिए।अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नवपदस्थ कलेक्टर विजय दयाराम के. पूरे मामले में निष्पक्ष प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाते हुए सीएमएचओ से विस्तृत प्रतिवेदन तलब करेंगे और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेंगे, या फिर यह मामला भी केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा। इसका उत्तर आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा।वहीं इस पूरे मामले पर एक बड़ा लेन देन होने की खबर है और किस ने कब और किसके माध्यम से पूरे मामले को दबाने के लिए लाखों रुपए का लेन-देन किया है,उसका खुलासा सर्वव्यापी जल्द ही करेंगी..!


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