तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार में एक बार फिर बड़े प्रशासनिक फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। मंत्रालय के प्रशासनिक गलियारों में इस बात की व्यापक चर्चा है कि आने वाले दिनों में कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिव, प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव स्तर के अधिकारियों के प्रभार में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या पुष्टि नहीं की गई है।सूत्रों के अनुसार, जिन विभागों में बदलाव की सबसे अधिक संभावना जताई जा रही है उनमें वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग तथा परिवहन विभाग प्रमुख हैं। इन तीनों विभागों को शासन की प्राथमिकताओं में महत्वपूर्ण माना जाता है और इनके माध्यम से करोड़ों रुपये की योजनाओं का संचालन होता है।प्रशासनिक चर्चाओं के अनुसार, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ को दो अलग-अलग अवसरों पर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का दायित्व सौंपा जा चुका है। इसी प्रकार सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह को दो बार स्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी मिली है, जबकि सचिव एस. प्रकाश को भी दो बार परिवहन विभाग का प्रभार दिया जा चुका है। अब यह चर्चा है कि लंबे समय से एक ही प्रकार की जिम्मेदारी निभा रहे इन अधिकारियों के विभागों में बदलाव किया जा सकता है।मंत्रालय में यह भी चर्चा है कि यदि यह फेरबदल होता है तो मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। चर्चाओं में प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पी. दयानंद, मुकेश बंसल, रजत कुमार, सोनमणि बोरा, जितेन्द्र शुक्ला तथा भुवनेश यादव के नाम सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि शासन अनुभव, कार्यकुशलता और प्रशासनिक समन्वय को ध्यान में रखते हुए इन अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागों का दायित्व सौंप सकता है।प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर विभागों का पुनर्वितरण शासन व्यवस्था का सामान्य हिस्सा होता है। इससे नई कार्यशैली, बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की संभावनाएं बढ़ती हैं। वहीं, कुछ अधिकारी लंबे समय तक एक ही विभाग में कार्य करने के बाद अन्य विभागों में भी अपनी प्रशासनिक क्षमता का प्रदर्शन कर सकते हैं।राज्य सरकार वर्तमान में अधोसंरचना विकास, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, परिवहन सुधार तथा निवेश बढ़ाने जैसे अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कार्य कर रही है। ऐसे में यदि विभागीय फेरबदल होता है तो इसे सरकार की प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा माना जाएगा।फिलहाल पूरा प्रशासनिक अमला संभावित आदेशों पर नजर बनाए हुए है। मंत्रालय के गलियारों में चर्चाएं लगातार जारी हैं, लेकिन अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री और सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर पर ही लिया जाएगा। जब तक आधिकारिक आदेश जारी नहीं होते, तब तक इन सभी संभावित बदलावों को केवल प्रशासनिक चर्चाएं और कयास ही माना जाना चाहिए।यदि आगामी दिनों में सरकार बड़े पैमाने पर प्रभार परिवर्तन का आदेश जारी करती है, तो इसका प्रभाव राज्य के अनेक महत्वपूर्ण विभागों की कार्यशैली और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर देखने को मिल सकता है।


