तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी
बिलासपुर जिला शिक्षा कार्यालय इन दिनों प्रशासनिक अव्यवस्था का उदाहरण बनता जा रहा है। जिले का सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा कार्यालय ऐसी स्थिति में पहुंच गया है, जहां न नियमित जिला शिक्षा अधिकारी सक्रिय रूप से उपलब्ध हैं और न ही वरिष्ठ अधिकारियों की प्रभावी मौजूदगी दिखाई दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये के बजट, हजारों शिक्षकों और सैकड़ों विद्यालयों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय आखिर किसके भरोसे लिए जा रहे हैं?प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल को पिछले दिनों उच्च न्यायालय के आदेश पर हटाया गया है, जब से यहां पर किसी जिला शिक्षा अधिकारी की पदस्थापना नहीं हुई है। वहीं दूसरी ओर विभाग के चारों सहायक संचालक अवकाश पर बताए जा रहे हैं। अटैचमेंट व्यवस्था समाप्त होने के बाद कई कर्मचारी भी अपने मूल पदस्थापना स्थल लौट चुके हैं। परिणामस्वरूप जिला शिक्षा कार्यालय में नेतृत्व का गंभीर अभाव दिखाई दे रहा है।लंबित हो रहे महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यकार्यालय में अधिकारी नहीं होने का सीधा असर विभागीय कार्यों पर पड़ रहा है। स्थानांतरण, वेतन निर्धारण, सेवा पुस्तिका का संधारण, पेंशन प्रकरण, अनुकंपा नियुक्ति, वित्तीय स्वीकृतियां, न्यायालयीन आदेशों का पालन सहित अनेक महत्वपूर्ण फाइलें निर्णय की प्रतीक्षा में बताई जा रही हैं। इससे शिक्षक, कर्मचारी, सेवानिवृत्त अधिकारी तथा आम नागरिकों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।प्रतिदिन अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लेकर आने वाले लोगों को अक्सर यह कहकर लौटना पड़ रहा है कि “साहब उपलब्ध नहीं हैं।” इससे लोगों का समय, श्रम और आर्थिक संसाधन भी प्रभावित हो रहे हैं।शासन ने अब तक वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि यदि विभाग में प्रशासनिक रिक्तता की स्थिति उत्पन्न हो गई है तो अब तक किसी अन्य सक्षम अधिकारी को प्रभार क्यों नहीं सौंपा गया? बिलासपुर जैसे बड़े जिले में जिला शिक्षा अधिकारी स्तर के निर्णय प्रतिदिन आवश्यक होते हैं। ऐसी स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होना प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह से भी उठ रहे सवालस्कूल शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव और विभागीय सचिव डॉ कमलप्रीत सिंह से भी यह सवाल उठ रहा है कि आखिर उनके कार्यकाल में बिलासपुर जिला शिक्षा कार्यालय प्रशासनिक अनिश्चितता का सामना क्यों कर रहा है? यदि किसी कारणवश नियमित अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, तो शासन का दायित्व है कि तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि विभागीय कार्य बाधित न हों।शिक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है व्यापक प्रभावविशेषज्ञों का मानना है कि जिला शिक्षा कार्यालय केवल एक प्रशासनिक कार्यालय नहीं, बल्कि पूरे जिले की शिक्षा व्यवस्था का संचालन केंद्र होता है। यहां निर्णयों में देरी का असर विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और शैक्षणिक योजनाओं तक पहुंचता है। यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी तो इसका व्यापक प्रभाव पूरे शिक्षा तंत्र पर पड़ सकता है।तत्काल निर्णय की आवश्यकताअब आवश्यकता इस बात की है कि शासन शीघ्र हस्तक्षेप करते हुए या तो नियमित जिला शिक्षा अधिकारी की नियुक्ति करे अथवा किसी वरिष्ठ एवं सक्षम अधिकारी को तत्काल अतिरिक्त प्रभार सौंपे। शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग को लंबे समय तक प्रशासनिक शून्यता के भरोसे छोड़ना न तो जनहित में है और न ही सुशासन के सिद्धांतों के अनुरूप।क्योंकि जब शिक्षा विभाग का नेतृत्व ही अनिश्चित हो जाए, तो उसका प्रभाव केवल फाइलों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र और भविष्य की पीढ़ियों पर भी पड़ता है।


