विकास नंद/ सर्वव्यापी

राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत द्वारा आयोजित “स्व. हरिवंश मिश्र राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान समारोह-2026” का आयोजन बुधवार को रायपुर के विमतारा, मधु पिल्ले चौक, शांति नगर में गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 250 उत्कृष्ट शिक्षकों को शिक्षा के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान, नवाचार, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट भूमिका के लिए राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से अलंकृत किया गया। इस अवसर पर सरायपाली विकासखंड के पांच शिक्षकों को भी उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक कार्यों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया।समारोह के मुख्य अतिथि हरिभूमि समूह के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षाविद एवं समाजसेवी संजय अग्रवाल ने की। विशिष्ट अतिथियों में डॉ. चितरंजन कर, पूर्व विभागाध्यक्ष (भाषा विज्ञान), पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर एवं रेल मंत्रालय के राजभाषा हिंदी सलाहकार तथा डॉ. पूर्णानंद मिश्रा, राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत शामिल रहे।इन शिक्षकों को मिला राष्ट्रीय सम्मानसमारोह में सरायपाली क्षेत्र के जिन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया, उनमें सुन्दर लाल डडसेना ‘मधुर’, सहायक शिक्षक, शासकीय आदिवासी कन्या आश्रम डूडूमचुंवा प्रमुख रहे। उन्हें गणित गार्डन जैसे नवाचार, शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, सामुदायिक सहभागिता तथा शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि वे पहले भी मुख्यमंत्री गौरव अलंकरण ‘शिक्षादूत’ सम्मान प्राप्त कर चुके हैं।इसके अलावा ओमप्रकाश साव (शासकीय उच्च प्राथमिक शाला रिमजी), दयासागर नायक (प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला दर्राभांठा), टिकेलाल भोई (प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला गोहेरापाली) तथा बनमोती भोई (प्रधानपाठक, शासकीय प्राथमिक शाला बोड़सरा) को भी शिक्षा में नवाचार, बच्चों के सर्वांगीण विकास और प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट मार्गदर्शन के लिए राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया।शिक्षक राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति : डॉ. हिमांशु द्विवेदीमुख्य अतिथि डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च रहा है। शिक्षक केवल विद्यार्थियों का भविष्य ही नहीं गढ़ता, बल्कि राष्ट्र के चरित्र, संस्कृति और सभ्यता का भी निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का सम्मान केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र के भविष्य का सम्मान है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत द्वारा शिक्षकों के सम्मान में किए जा रहे इस प्रयास को शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी बताया।शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को मिलेगा निरंतर मंचराष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. पूर्णानंद मिश्रा ने कहा कि स्व. हरिवंश मिश्र के शिक्षा, अनुशासन और समाज सेवा के आदर्शों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से इस राष्ट्रीय सम्मान की शुरुआत की गई है। संस्था भविष्य में भी देशभर के उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करती रहेगी।संरक्षक मनोज वर्मा ने कहा कि शिक्षक समाज के वास्तविक प्रेरणास्रोत हैं, जबकि राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका डॉ. प्रज्ञा सिंह ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और संस्कारों का निर्माण करना भी है।देशभर के शिक्षकों की रही सहभागितासमारोह में स्व. हरिवंश मिश्र के शिक्षा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में दिए गए योगदान को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। देशभर से आए शिक्षकों, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। सम्मानित शिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षा अंजोर भारत की इस पहल को शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी बताया।कार्यकारी प्रांताध्यक्ष जितेन्द्र मिश्रा ने सभी अतिथियों एवं सहभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “जब एक शिक्षक सम्मानित होता है, तब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था, उसके विद्यार्थी और राष्ट्र का भविष्य सम्मानित होता है।”कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय महासचिव मोहन लहरी ने किया तथा राष्ट्रगान के साथ समारोह का समापन हुआ। आयोजन की सफलता में डिजेंद्र कुर्रे, प्रेमचंद साव, डॉ. प्रज्ञा सिंह, रिंकल बग्गा, तरुण कुमार दास, पीतांबर मानिकपुरी, अजय कुमार जायसवाल, रूद्र नारायण तिवारी, वीरेंद्र कुमार कर, रीता पति, शैलेन्द्र नायक, मनोज मुच्छावड़, योगेश सिंह ठाकुर, गायत्री मिश्रा, एम.एन. वर्मा और आनंद शर्मा सहित राष्ट्रीय एवं प्रदेश स्तरीय पदाधिकारियों का उल्लेखनीय योगदान रहा।


