वनमंडल की 43 पन्नों की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं, छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने सरकार से पूछा— आखिर दोषियों को संरक्षण क्यों? - Sarvavyapi वनमंडल की 43 पन्नों की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं, छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने सरकार से पूछा— आखिर दोषियों को संरक्षण क्यों? - Sarvavyapi

वनमंडल की 43 पन्नों की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं, छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने सरकार से पूछा— आखिर दोषियों को संरक्षण क्यों?

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गौरेला पेंड्रा मरवाही,नूर मोहम्मद ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी

बिलासपुर संभाग के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही वनमंडल में कथित वित्तीय अनियमितताओं और शासकीय योजनाओं में भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर एक बार फिर मामला गरमा गया है। छत्तीसगढ़िया एकता मंच, छत्तीसगढ़ ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, वन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ को विस्तृत शिकायत भेजकर वर्ष 2023 में तैयार की गई विभागीय जांच रिपोर्ट पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक, प्रदेश सचिव भागवत प्रसाद, बिलासपुर जिलाध्यक्ष देवेंद्र बंजारे, जिला उपाध्यक्ष प्रदीप सिंह सोलंकी के हस्ताक्षर से भेजे गए ज्ञापन में कहा गया है कि मरवाही वनमंडल में विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान कथित आर्थिक अनियमितताओं, शासकीय राशि के दुरुपयोग तथा वित्तीय गड़बड़ियों की विभागीय जांच कराई गई थी। जांच पूरी होने के बाद सक्षम जांच समिति ने लगभग 388 के साथ ही 43 पृष्ठों का जांच प्रतिवेदन अलग-अलग तैयार कर वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सौंपा था। शिकायत के अनुसार संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध विभागीय स्तर पर कार्रवाई प्रारंभ करने के लिए मंत्री स्तर से नोटशीट भी संचालित हुई थी, लेकिन इसके बावजूद आज तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 से लेकर आज तक जांच रिपोर्ट में दर्ज गंभीर तथ्यों के बावजूद संबंधित पूर्व एवं वर्तमान अधिकारियों के विरुद्ध न तो विभागीय कार्रवाई की गई और न ही किसी प्रकार की वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इससे यह संदेश जा रहा है कि गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में भी दोषी अधिकारियों को संरक्षण प्राप्त है।छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने अपने ज्ञापन में कहा है कि यदि जांच प्रतिवेदन में दर्ज तथ्यों पर कार्रवाई नहीं होती है तो शासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। संगठन का कहना है कि जब विभागीय जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट शासन के पास उपलब्ध है, तब कार्रवाई में लगातार हो रही देरी आम जनता के बीच शासन की कार्यप्रणाली को लेकर संदेह उत्पन्न कर रही है।ज्ञापन में सरकार से मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष समीक्षा कराई जाए तथा जांच प्रतिवेदन में जिन अधिकारियों के विरुद्ध प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाए गए हों, उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत तत्काल विभागीय और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि लंबे समय से लंबित इस मामले में शासन द्वारा शीघ्र कार्रवाई नहीं की जाती है, तो भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग को लेकर आगे की वैधानिक कार्यवाही पर भी विचार किया जाएगा।मरवाही वनमंडल से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें राज्य सरकार और वन विभाग पर टिकी हैं कि वर्ष 2023 की विभागीय जांच रिपोर्ट पर आखिर कब निर्णय लिया जाता है और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होती है या नहीं।


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