बिलासपुर नगर निगम की खुली पोल: बारिश ने खोली दावों की हकीकत, घरों में घुसा पानी, सड़कें बनीं तालाब। - Sarvavyapi बिलासपुर नगर निगम की खुली पोल: बारिश ने खोली दावों की हकीकत, घरों में घुसा पानी, सड़कें बनीं तालाब। - Sarvavyapi

बिलासपुर नगर निगम की खुली पोल: बारिश ने खोली दावों की हकीकत, घरों में घुसा पानी, सड़कें बनीं तालाब।

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तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर नगर निगम द्वारा हर वर्ष मानसून से पहले नालों की सफाई, जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और जलभराव की समस्या से शहरवासियों को राहत दिलाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश ने इन सभी दावों की पोल खोलकर रख दी है। शहर के अनेक रिहायशी इलाकों में बारिश का पानी सड़कों से निकलकर सीधे लोगों के घरों तक पहुंच गया। कई कॉलोनियों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो गया।विनोबा नगर, विद्या नगर सहित शहर के कई मोहल्लों में हालात बेहद चिंताजनक दिखाई दिए। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गलियों में कई फीट तक पानी भरा हुआ है और यह पानी लोगों के घरों के भीतर तक पहुंच गया है। घरों में रखा सामान खराब होने लगा, वाहन पानी में डूब गए और नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम द्वारा हर साल करोड़ों रुपये नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था पर खर्च किए जाने का दावा किया जाता है, लेकिन पहली ही तेज बारिश में पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाती है। यदि समय रहते नालों की समुचित सफाई और जल निकासी की व्यवस्था की गई होती तो लोगों को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।लगातार हो रही बारिश के कारण शहर के अधिकांश क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई है। कई स्थानों पर मुख्य सड़कें भी पानी में डूब गईं, जिससे यातायात प्रभावित हुआ और वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ी। कई इलाकों में लोगों को घरों से बाहर निकलने के लिए पानी से होकर गुजरना पड़ा।शहरवासियों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से मानसून पूर्व तैयारियों को लेकर केवल कागजी दावे किए गए, जबकि जमीनी स्तर पर पर्याप्त कार्य नहीं हुआ। नालों में गाद, कचरा और अवरोध होने के कारण बारिश का पानी निकासी नहीं पा सका और पूरी कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। नागरिकों का कहना है कि यदि यही स्थिति कुछ और दिनों तक बनी रही तो जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।बारिश ने यह भी उजागर कर दिया है कि शहर के कई हिस्सों में वर्षों से जल निकासी की स्थायी व्यवस्था विकसित नहीं की गई है। हर वर्ष बरसात के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई प्रभावी पहल दिखाई नहीं देती। इस बार भी निगम प्रशासन के सभी दावे धरातल पर विफल साबित होते नजर आ रहे हैं।अब शहरवासियों की निगाहें नगर निगम प्रशासन और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। लोग मांग कर रहे हैं कि जलभराव वाले क्षेत्रों से तत्काल पानी निकाला जाए, प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाई जाए तथा मानसून के दौरान आपातकालीन व्यवस्था को सक्रिय किया जाए। साथ ही पूरे मामले की समीक्षा कर यह भी तय किया जाए कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद हर वर्ष शहर को जलभराव की समस्या से क्यों जूझना पड़ रहा है।लगातार हो रही बारिश ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिलासपुर नगर निगम केवल दावे करने तक सीमित है या फिर शहर की मूलभूत समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए भी कोई ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी। फिलहाल शहर के कई हिस्सों में हालात सामान्य होने का इंतजार है, जबकि नागरिक बारिश थमने के साथ-साथ प्रशासन की प्रभावी कार्रवाई की भी उम्मीद लगाए बैठे हैं।


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