छत्तीसगढ़ में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों पर सख्ती, एक सप्ताह में मूल पदस्थापना पर नहीं लौटे तो रुकेगा वेतन, होगी 'ब्रेक इन सर्विस' की कार्रवाई। - Sarvavyapi छत्तीसगढ़ में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों पर सख्ती, एक सप्ताह में मूल पदस्थापना पर नहीं लौटे तो रुकेगा वेतन, होगी 'ब्रेक इन सर्विस' की कार्रवाई। - Sarvavyapi

छत्तीसगढ़ में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों पर सख्ती, एक सप्ताह में मूल पदस्थापना पर नहीं लौटे तो रुकेगा वेतन, होगी ‘ब्रेक इन सर्विस’ की कार्रवाई।

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विकास नंद/सर्वव्यापी

लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) छत्तीसगढ़ ने शासकीय विद्यालयों एवं कार्यालयों में कार्यरत गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों के संलग्नीकरण (अटैचमेंट) को लेकर सख्त रुख अपनाया है। संचालनालय द्वारा जारी दो अलग-अलग आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त माना जाएगा और उन्हें एक सप्ताह के भीतर अपनी मूल पदस्थापना संस्था में कार्यभार ग्रहण कर ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करानी होगी।डीपीआई ने कहा है कि पूर्व में भी कई बार आदेश जारी कर सभी गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों को मूल संस्था में लौटकर ऑनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अनेक कर्मचारी अब भी संलग्न स्थानों पर कार्यरत हैं तथा मूल पदस्थापना स्थल पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं। इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत माना गया है।आदेश के अनुसार यदि कोई कर्मचारी निर्धारित एक सप्ताह की अवधि में अपनी मूल संस्था में कार्यभार ग्रहण नहीं करता है अथवा ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं करता है, तो उसका जुलाई 2026 का वेतन रोक दिया जाएगा। इसके साथ ही संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।डीपीआई ने 15 जुलाई को जारी एक अन्य पत्र में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि निर्धारित समय सीमा के बाद कार्यभार ग्रहण करने वाले कर्मचारियों के विरुद्ध ‘ब्रेक इन सर्विस’ (सेवा में व्यवधान) की कार्रवाई का प्रस्ताव संचालनालय को भेजना सुनिश्चित करें। अर्थात निर्धारित समय में मूल पदस्थापना पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों की अनुपस्थिति अवधि को सेवा में व्यवधान मानते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं, ताकि विद्यालयों एवं शासकीय कार्यालयों में गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से संचालित हो सके।


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