पहली बारिश में खुली करोड़ों की सड़कों की हकीकत, बिलासपुर में बीच सड़क धंसी तो उठे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल। - Sarvavyapi पहली बारिश में खुली करोड़ों की सड़कों की हकीकत, बिलासपुर में बीच सड़क धंसी तो उठे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल। - Sarvavyapi

पहली बारिश में खुली करोड़ों की सड़कों की हकीकत, बिलासपुर में बीच सड़क धंसी तो उठे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल।

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तरुण कौशिक, संपादक, सर्वव्यापी

बिलासपुर शहर में बारिश ने एक बार फिर विकास कार्यों की गुणवत्ता की परीक्षा ले ली है। पहली तेज बारिश के बाद ही सड़क निर्माण की मजबूती पर सवाल खड़े होने लगे हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाई जा रही सड़कों की स्थिति अब चिंता का विषय बनती जा रही है। कहीं जलभराव तो कहीं सड़क धंसने की घटनाओं ने नगर की बुनियादी सुविधाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है।ताजा मामला वार्ड क्रमांक-23 मदर टेरेसा क्षेत्र का है, जहां सत्यम चौक से मगरपारा जाने वाली मुख्य सड़क अचानक धंस गई। व्यस्त मार्ग के बीचों-बीच बने गहरे गड्ढे ने राहगीरों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। खास बात यह है कि इसी मार्ग से बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे रोजाना आवाजाही करते हैं।स्कूल मार्ग बना खतरे का रास्ताबारिश के दौरान सड़क का एक हिस्सा अचानक कमजोर होकर धंस गया, जिससे बीच सड़क पर बड़ा गड्ढा बन गया। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति निर्मित हो गई। स्थानीय लोगों के अनुसार, मार्ग पर स्थित आत्मानंद स्कूल के कारण यहां दिनभर बच्चों और अभिभावकों की आवाजाही रहती है, ऐसे में सड़क धंसना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है।नागरिकों का आरोप है कि सड़क धंसने के बाद लंबे समय तक मौके पर कोई जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा। न ही तत्काल बैरिकेडिंग कर खतरे वाले हिस्से को सुरक्षित किया गया, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रही।गड्ढे की चपेट में आए वाहन, लोगों में नाराजगीस्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क धंसने के बाद दो ऑटो इस गड्ढे में फंस चुके हैं। इनमें स्कूली बच्चे भी मौजूद थे। इसके अलावा कई दोपहिया वाहन चालक भी असंतुलित होकर गिरने से बाल-बाल बचे।घटना को लेकर क्षेत्रवासियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर गुणवत्ता की निगरानी नहीं हो रही है। इसका सीधा असर आम जनता की सुरक्षा पर पड़ रहा है।33 करोड़ की सड़क पर भी उठे सवालइधर नेहरू चौक से दर्रीघाट तक करीब 33 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सड़क भी बारिश के बाद चर्चा में है। शहर की इस महत्वपूर्ण परियोजना को विकास की बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया था, लेकिन पहली ही बारिश के बाद सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।लोगों का कहना है कि यदि नई सड़कें भी मानसून की पहली परीक्षा में कमजोर साबित होने लगें तो निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और जिम्मेदार एजेंसियों की भूमिका की जांच जरूरी हो जाती है।जलभराव के बाद अब धंस रही सड़केंइस मानसून में बिलासपुर पहले ही जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। कई इलाकों में बारिश का पानी भरने के बाद अब सड़क धंसने की घटनाएं सामने आने लगी हैं। इससे शहर की ड्रेनेज व्यवस्था के साथ-साथ सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।कुछ समय पहले रतनपुर–गेंदा मार्ग पर भी सड़क में दरारें आने की शिकायतें सामने आई थीं। लगभग 600 करोड़ रुपये की परियोजना को लेकर उठे सवालों के बाद अब शहर के अंदर सड़क धंसने की घटना ने निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।बारिश आते ही क्यों सामने आती है विकास कार्यों की कमजोरी?शहरवासियों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान सड़कें खराब होना, गड्ढे बनना और निर्माण कार्यों की खामियां सामने आना अब आम बात हो गई है। सवाल यह है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कें टिकाऊ क्यों नहीं बन पा रही हैं?फिलहाल सड़क धंसने की घटना के बाद क्षेत्र में भय का माहौल है। लोगों ने मांग की है कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच कर दोषी एजेंसियों और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे को टाला जा सके।


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