संपादक की कलम से… छत्तीसगढ़िया मन जरा सोचव…

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तरुण कौशिक /संपादक

छत्तीसगढ़ राज्य के रहवासी मन ल दुनिया भर के लोगन मन “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” के नांव से जानथे,फेर आज हम छत्तीसगढ़िया मन ए नांव बस के रहिथे हन अऊ अपनेच छत्तीसगढ़ म एक गुमनामी के जिंदगी जीए बर मजबूर होत हवन,मोला आईसन लगत हे..! छत्तीसगढ़िया मन बर बड़ सम्मान के गोठ बात आए के हमन ल ” छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया ” के मान-सम्मान मिले हे फेर आज ए ह सिरतोन रुप ले नांव बस के रहिथे हवै। आज छत्तीसगढ़िया मन अपन खुद के महतारी भासा छत्तीसगढ़ी म लिखा पढ़ी नई कर पावत हे, छत्तीसगढ़ी बोले म सरमवत हे, आज छत्तीसगढ़ आईसन राज्य बनके जऊन राजनीतिक के चक्कर म दूसर परदेस के राज्योत्सव तिहार ल छत्तीसगढ़िया मन ल मनाए बर पड़त हे, जावव दूसर परदेस ल देखव ऊंहा के रहवाईया मन अपन खुद के महतारी भासा म नई केवल लिखा- पढ़ी, पढ़ाई-लिखाई करथे बल्कि वोमन के भासा म सबों सरकारी काम-काज घलोक होत हवै। आज दक्षिण भारत के बाद दूर हमर पड़ोसी राज्य उड़िसा अऊ महाराष्ट्र के लोगन मन सबों कामकाज ल अपन महतारी भासा म करत हे,ईहा तक विधानसभा घलोक म अपन भासा म बोलचाल करथे अऊ अपन परदेस म सिर्फ अपनेच राज करत हे परदेसिया मन ल राज करें ल नई देवत हे, परदेसिया मन के नौकरी करके गुलाम नई बनत हे फेर आज छत्तीसगढ़िया मन छत्तीसगढ़ी भासा म पढ़ाई-लिखाई, बोलचाल के बात दूर ईहां तौ अपनेच खेती-बाड़ी ल परदेसिया मन मेर बेच के परदेसिया मन के नौकरी करत हे, अऊ खुद ल छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया कहवत हवै तौ काय फायदा हवै,जरा सोचव..! हम सबों ल पता हवै के लोगन के पहिचान ओखर घर परिवार,अऊ महतारी भासा ले होथे तौ फेर आज हमन ए सब म पाछू कांहे हन, काबर हमन परदेसिया मन के आघू-पाछू भागत हन..? निश्चित रूप ले छत्तीसगढ़िया मन ल आघू आके अपन संस्कृति, परंपरा, रिती रिवाज, बोलचाल, वेशभूषा ल अपनाए ल पड़ही..! एखर संगे संग हमन ल अपन परदेस म दूसर परदेस के लोगन मन ल गुलाम बनाए के जरुरत हे नई के हमन ल खुद परदेसिया मन ल अपन गुलाम बनाए के जरुरत हे। आज छोटे से कारोबार करईया मन सब परदेसिया आए, रोजी-रोटी के तलास म हमर छत्तीसगढ म आईस अऊ छोटे से दुकानदारी करके आज हजारों एकड़ के मालिक बनके हे, सहर ले लेके गांव देहात घलोक म परदेसिया मन अपन कब्जा कर लिस अऊ हम छत्तीसगढ़िया मन ओखर गुलाम बनके रहिथे हन..! आज छत्तीसगढ़िया मन के अऊ हमर महतारी भासा छत्तीसगढ़ी के विकास, दुनिया म पहिचान नई बना पाना हमर छत्तीसगढ सरकार के अनदेखी नई बल्कि हम छत्तीसगढ़िया मन के सबले बड़ गलती आए,जऊन मन दूसर परदेस के तरह अपन महतारी भासा छत्तीसगढ़ी ल आघू नई बढ़ाए पाईन अऊ सबले बड़ सरम के गोठ बात आए के हम छत्तीसगढ़िया मन आपस म खुद राष्ट्रीय भासा म पढ़ाई-लिखाई, बोलचाल करत हन तौ फेर हमर काय होही, निश्चित रूप ले हम छत्तीसगढ़िया मन ल परदेसिया मन ” छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया ” कहिथे,ईही कारण मान सम्मान देवत हे,काबर के हम छत्तीसगढ़िया मन दू पईसा के लालच म आके अपन खेती-बाड़ी ल परदेसिया मन ल बेचत हन अऊ ओखरे गुलामी करत हन..! छत्तीसगढ़िया मन सबले बढ़िया सिरतोन रुप ऊही दिन होही जेन दिन छत्तीसगढ़िया मन अपन अस्तित्व कायम रखे बर अपन महतारी भासा छत्तीसगढ़ी म लिखा-पढ़ी, बोलचाल कर ही। बड़ सरम के गोठ बात आए के अंग्रेजी ह हमर कोनों भासा नो हय अऊ हमन अपन लइका मन ल अंग्रेजी मिडिया म पढ़वत हन अऊ छत्तीसगढ़ी भासा ले दूर करत हन। कुल मिला के छत्तीसगढ़िया मन नांव बस के “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” बनके रहिथे हवै,अब छत्तीसगढ़िया मन ल बदलाव बर काम बूता करना अब्बड़ -अब्बड़ जरुरी हे,नई तौ आवाईया बेरा म छत्तीसगढ़िया मन के अस्तित्व पूरा सिरा जाही, जेकर जिम्मेदार खुद छत्तीसगढ़िया मन होही..!


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