तरुण कौशिक /संपादक /
छत्तीसगढ़ राज्य को बने 25 वर्ष होने जा रहा रहा है और यहां पर हर चीज बदल गई है, शिक्षा से लेकर व्यक्ति का विचार भी बदल चुका है लेकिन नहीं बदली है तो हमारे बिलासपुर शहर के तिफरा प्राथमिक विद्यालय का एक भवन और नीम का विशाल वृक्ष जिसके छांव के तले मैंने ही नहीं बल्कि तिफरा के हजारों बच्चों ने इस वृक्ष के नीचे शिक्षा ग्रहण किया था।
आज बहुत दिनों बाद अपने घर से कुछ कदमों की दूरी पर स्थित शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल पहुंचा जो पहले सिर्फ हाई स्कूल तक संचालित हो रही थी लेकिन आज यह स्कूल बारहवीं कक्षा तक संचालित हो रही है। वहीं जिस पुराने स्कूल भवन में कक्षा पहली से पांचवीं तक शिक्षा ग्रहण किया,आज वह भवन आज भी अपने पुराने स्थिति में है और बाजू में नीम का विशाल वृक्ष, जिसके नीचे मैंने अपनी प्राथमिक शिक्षा ग्रहण किया आज इस विशाल वृक्ष और स्कूल को देखकर बहुत ही सुकुन मिला। यूं तो तिफरा का यह सरकारी स्कूल पूरी तरह से बदल चुका है लेकिन आज भी एक पुरानी खप्पर वाली भवन खड़े हुए हैं, जहां पर अली सर, निशा मैडम, नंदिनी वर्मा,थाॅमस मैडम,वर्मा मैडम, वैष्णव सर आदि वरिष्ठ शिक्षकों जिसमें कुछ शिक्षक अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं ने हमें आज इस मुकाम पर लाया है कि आज हमने एक अलग पहचान बना हुए हैं। सबसे मजे कि बात यह है कि जो वृक्ष हमारे वरिष्ठ साथियों ने लगाए थें वह आज भी खड़े हुए हैं और यह नीम का वृक्ष अब हमारे बच्चों को शीतलता भरी शुद्ध हवा दे रही है। निश्चित रूप से तिफरा प्राथमिक,हाई स्कूल का तस्वीर पूरी तरह से बदल गई परन्तु नीम का वृक्ष और जिस भवन में हमने शिक्षा प्राप्त किया वह आज भी बड़े शान से खड़े हुए हैं। मैं वर्तमान शिक्षकों से यही निवेदन करना चाहता हूं कि इस विद्यालय प्रांगण में बहुत जगह है, जहां पर वृक्षारोपण किया जा सकता है और जब हमने सन 1990-91 में कक्षा पहली में अध्ययन प्रारंभ किए तो यही नीम के वृक्ष तले हमने शिक्षा ग्रहण किया जो आज भी हरा-भरा शीतलता प्रदान कर रही है,इसलिए यहां फल दार वृक्ष के बजाए छायादार वृक्ष लगाने पत्र जोर दे..!