बिलासपुर/ तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/ छत्तीसगढ़ में सरकार बदल गई लेकिन प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कोई बदलाव नजर नहीं आ रहा है और पूर्व कांग्रेस सरकार की तरह विष्णु सरकार भी जनदर्शन लगाकर जनता की समास्याओं का निराकरण करने का ढिंढोरा पीट रहे हैं लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मुख्यमंत्री के जनदर्शन और सुशासन तिहार में भी लोगों की समास्याओं का निराकरण नहीं हो पा रहा है और सीएम जनदर्शन का अधिकांश आवेदन पत्र जिले कलेक्टरों को निराकरण के लिए भेजा जा रहा है। जिससे यह कहना गलत नहीं होगा कि भाजपा की विष्णु देव साय की सरकार में भी जनदर्शन एक दिखावा से कम नहीं है और छत्तीसगढ़ में जनदर्शन अब एक परंपरा बनती नजर आ रही है, क्यों कि जोगी सरकार से लेकर रमन, भूपेश और अब विष्णु सरकार में भी जनदर्शन लगाएं जा रहे हैं लेकिन समास्याओं का निराकरण सरकारी कागजों की शोभा बनती जा रही है। वहीं छत्तीसगढ़ राज्य की विष्णु देव साय के लिए बड़े ही चिंता का विषय है कि वर्तमान भाजपा सरकार के कार्यकाल को लगभग डेढ़ साल होने जा रहे हैं परंतु जनहित की मुद्दों को लेकर सरकार गंभीरता से कार्रवाई नहीं कर पा रही है,जो प्रशासनिक कसावट न होने के कारण देखने को मिल रहे हैं और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय जनहित के मुद्दों को संज्ञान लेकर जनसुनवाई कर रहे हैं , जिससे प्रशासनिक अधिकारियों की नींद टूट रही है और उच्च न्यायालय की फटकार के बाद जनता को राहत मिल रही है,जो विष्णु देव साय सरकार के लिए बड़े चिंतनीय विषय है। वहीं राज्य के विभिन्न जिलों में हत्या,लूट,बलात्कार,चाकूबाजी और अन्य घटनाओं से प्रदेश में डर का माहौल है और रोज प्रदेश के सभी जिले अपराधों से कांप रहे है। आम आदमी स्वतंत्र रूप से कहीं जा नहीं पा रहा है और मासूम से मासूम बेटियाँ भी सुरक्षित नहीं रह गई है।बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ बस एक नारा ही रह गया है।प्रदेश में बलौदाबाजार और कवर्धा की घटना ने क़ानून व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जहां पुलिस दमन नीति से निपटना चाह रही है पुलिस का बर्बर व्यवहार ये बता रहा है कि अब स्तिथियाँ नियंत्रण में नहीं है और सरकार की पनाह में मौत हो जाना एक बड़ा प्रश्न खड़ा करता है! साय सरकार में इतनी जल्दी ऐसी स्तिथि आ जाएगी ये सोंचा नहीं था लेकिन सच यही है कि अब सरकार अपनी पकड़ खो चुकी है।वहीं संवैधानिक पद पर विराजमान राज्यपाल रमेन डेका जब से यहां पर पदस्थ हुए हैं,तब से राज्यपाल कम मुख्यमंत्री के रूप में ज्यादा नजर आ रहे हैं , क्योंकि छत्तीसगढ़ की इतिहास में पहली बार राज्यपाल जिलों में जाकर संभाग और जिला स्तर के उच्च अधिकारियों की बैठक लेकर केंद्र सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर पर लाने के लिए दिशा-निर्देश दे रहे हैं जो निश्चित रूप से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यप्रणाली को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है..! वहीं विष्णु देव साय की सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर अब राज्य स्तरीय उच्च अधिकारियों का कहना है कि इससे अच्छा तो कांग्रेस सरकार थी , जिसके समय में सरकार का महत्व क्या सबको पता चल जाता था लेकिन विष्णु सरकार में कोई सरकार चल रही है या नहीं पता नहीं चल पा रही है। सिवाय एक महीने के भीतर दो-दो बार में कैबिनेट बैठक और उत्सव मनाने तक विष्णु देव साय की सरकार सिमिट कर रह गई है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आने वाले समय में राज्यपाल और उच्च न्यायालय को ही सरकार की कामकाज को ध्यान देना पड़ जाए या फिर मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार को राज्यपाल को दे दिया जाए..! वहीं वर्तमान सरकार की कार्यप्रणाली से उनके ही कार्यकर्ता और विधायक, सासंद तक भी संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। जिसके लिए सासंद, विधायकों को मुख्यमंत्री को जनहित मुद्दे पर चिट्ठी लिखना पड़ रहा है। बहरहाल देखना है कि भविष्य में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सख्त होकर अपने पांच साल का कार्यकाल पूर्ण कर पाते हैं या फिर पद से हाथ खोना पड़ जाए,यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा..!