रमाकांत मिश्र/ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ का एक जिला जो “राजनीतिक लालबत्तियों का स्वर्ग” तो बन गया, पर आज भी सड़क की रोशनी से कोसों दूर है।हम बात कर रहे हैं — जशपुर की। वही जशपुर जिसने राज्य को न सिर्फ एक मजबूत राजनीतिक नेतृत्व दिया, बल्कि पूरे देश में अपनी सांस्कृतिक, कृषि और जनजातीय पहचान को बखूबी जीवित रखा।लेकिन एक कटु सच्चाई यह भी है कि जशपुर आज भी मूलभूत ढांचे की उपेक्षा का सबसे जीवंत उदाहरण है। सड़कों की स्थिति इतनी दयनीय है कि सामान्य यात्रा भी एक दंड प्रक्रिया से कम नहीं। विडंबना यह है कि यह वही जशपुर है, जिसने देश को 4 बार सांसद और अब छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री दिया —
विष्णुदेव साय एक ओर नेतृत्व, दूसरी ओर उपेक्षा वर्तमान
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का ताल्लुक जशपुर जिले के एक छोटे से गांव से है। उन्होंने चार बार सांसद रहते हुए न सिर्फ दिल्ली की राजनीति में अपनी एक अहम पहचान बनाई, बल्कि छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय नेतृत्व के सबसे बड़े चेहरे बनकर उभरे। उनके मुख्यमंत्री बनने को लेकर जशपुर में जबरदस्त उत्साह था, लेकिन समय के साथ यह उम्मीदें मायूसी में तब्दील होती गईं।क्योंकि सड़क वहीं रह गई…सड़क जो जशपुर को रायपुर और राजधानी अंबिकापुर से जोड़ती है — वही सड़क आज सबसे बड़े संकट का रूप ले चुकी है। यह सड़क ना सिर्फ टूटी हुई है, बल्कि अब बरसात के साथ इसमें गड्ढों की गहराई मानो लोगों की उम्मीदों की गहराई से होड़ लगा रही है।
जशपुर की वर्तमान सड़क स्थिति
एक आपदा की ओरआज जशपुर जिले से राजधानी तक पहुंचने के लिए एकमात्र साधन है — सड़क। न रेल, न वायु, न ही कोई वैकल्पिक मार्ग।जिले के मुख्य मार्ग NH-43 (पूर्व का NH-78) का कार्य पिछले 11 वर्षों से अधूरा पड़ा है। भारतमाला परियोजना के तहत इस मार्ग को रायगढ़, पत्थलगांव, लुधरा, कुनकुरी, और जशपुर होते हुए अंबिकापुर से जोड़ने की योजना बनी थी, लेकिन ज़मीनी हकीकत यही है कि यह सड़क अब भी अधूरी और दयनीय अवस्था में है।> बरसात की पहली बूँद के साथ ही जशपुर के रास्ते बंद हो जाते हैं।यह सड़क न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बाधित करती है, बल्कि यह रोजगार और व्यापार के अवसरों को भी सीमित कर रही है।
कृषि उत्पादों की उपेक्षा:
लिची और टमाटर की ‘टूटी सप्लाई चेन’जशपुर की लिची देशभर में प्रसिद्ध है। यहाँ की जलवायु इसे खास बनाती है। वहीं टमाटर की खेती जशपुर को पश्चिम बंगाल तक जोड़ती है। पर सड़क खराब होने से किसानों को मंडियों तक माल पहुंचाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नतीजतन किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचना पड़ता है या सड़ने देना पड़ता है।
बदलाव की राजनीति, लेकिन क्यों नहीं बदली सड़क?राजनीति की बात करें तो जशपुर ने बीजेपी को 4 बार सांसद दिया, एक केंद्रीय मंत्री दिया और अब मुख्यमंत्री भी दिया। 2014 के बाद से केंद्र और 2013 के बाद से राज्य सरकार में अधिकतर समय बीजेपी की ही सत्ता रही।> तो फिर सड़क क्यों नहीं बनी?क्या यह असफलता योजनाओं की है, या राजनीतिक इच्छाशक्ति की?बीजेपी की उपलब्धियों की लिस्ट में जशपुर का नाम जरूर होता है, लेकिन जमीनी स्तर पर वह उपलब्धियां अब तक दृश्य नहीं हैं।
विपक्ष का आरोप: “मुख्यमंत्री जी की सड़क पर ध्यान नहीं है”हाल ही में कांग्रेस ने जशपुर में “सड़क सत्याग्रह” आयोजित कर विरोध जताया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने “मुख्यमंत्री मुर्दाबाद” के नारे भी लगाए। कांग्रेस विधायक लुण्ड्रा से, मिंज ने कहा:> “11 वर्षों की उपलब्धियों में हमें कुछ नहीं दिखा, सड़क भी वहीं की वहीं है।”जहां एक ओर विपक्ष राजनीति कर रहा है, वहीं उनकी बातें पूरी तरह गलत भी नहीं कही जा सकतीं।
सामाजिक ताना-बाना और धर्मांतरण की पृष्ठभूमि जशपुर की एक और महत्वपूर्ण सामाजिक सच्चाई यह है कि यह जिला धर्मांतरण की आग में झुलसा हुआ है। सदियों पहले मिशनरियों द्वारा आदिवासियों को लालच और प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया गया। आज जशपुर में कंवर और उरांव जनजातियों का एक बड़ा वर्ग ईसाई धर्म अपना चुका है।यह धार्मिक परिवर्तन आज भी सामाजिक ताने-बाने में विभाजन और मनोवैज्ञानिक संघर्ष का कारण बनता है। कई संगठन इसे आदिवासी अस्मिता से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे स्वेच्छा का मामला मानते हैं। पर एक बात तय है कि जशपुर की अस्मिता आज भी संघर्षरत है।
विकास की राह में सबसे बड़ी रुकावट:
बुनियादी ढांचे की अनदेखीआज जब देश के सबसे दूरस्थ गाँवों को इंटरनेट, मोबाइल टावर, हवाई सुविधा और एक्सप्रेसवे से जोड़ा जा रहा है, तब जशपुर जैसे जिलों को सड़क तक भी ठीक से नहीं मिल पा रही है।> जशपुर के युवा बड़ी संख्या में पढ़ाई और नौकरी के लिए बाहर जाते हैं। लेकिन खराब सड़कें उनके सपनों की राह में सबसे बड़ी रुकावट हैं।✦ आखिर कब मिलेगा जवाब?मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में मीडिया से कहा था कि जशपुर के विकास में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
> तो फिर सवाल है — कब मिलेगा वो विकास?
क्या मुख्यमंत्री अब भी एक सांसद की भूमिका में हैं? या वे वाकई में एक ऐसे नेता बन पाएंगे जो जशपुर को सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी से जोड़ सके?
जशपुर को केवल राजनीति नहीं, योजनाबद्ध दृष्टि चाहिए आज जशपुर को केवल भाषण नहीं चाहिए, उसे सशक्त सड़क चाहिए।उसे योजनाओं की घोषणा नहीं, उनका क्रियान्वयन चाहिए।उसे मुख्यमंत्री का भाषण नहीं, उनका ध्यान चाहिए।जशपुर न केवल छत्तीसगढ़ का स्वर्ग है, बल्कि यह भारत के जनजातीय, सांस्कृतिक और प्राकृतिक वैभव का प्रतीक है। यदि आज भी इस स्वर्ग को सड़क के माध्यम से बाकी देश से नहीं जोड़ा गया, तो हम केवल एक भूगोलिक जिले को नहीं, बल्कि अपनी विरासत और विकास के वादे को भी खो देंगे।> जशपुर को अब किसी और मुख्यमंत्री की नहीं, एक जिम्मेदार मुख्यमंत्री की जरूरत है… जो सड़क को भी नेतृत्व जितनी प्राथमिकता दे।