तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
आज हमारे बीच छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम सचिव एवं छत्तीसगढ़ी हास्य कवि डॉ सुरेंद्र दुबे नहीं रहे और भगवान की श्रीधाम चले गए हैं, जहां से वह हमें निश्चित रूप से अपना आशिर्वाद देंगे। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में जन्मे डॉ सुरेंद्र दुबे एक ऐसा हास्य कवि थे जो मंच पर रहकर अपनी छत्तीसगढ़ी कविताओं के माध्यम से मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक की तारीफ करते हुए श्रोताओं को हंसाने में पीछे नहीं हटे । वरिष्ठ हास्य कवि एवं छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम सचिव डॉ सुरेंद्र दुबे की कविताएं जहां एक ओर छत्तीसगढ़ी भाषा को लेकर हम छत्तीसगढ़ियों को जागरूक कर अपनी राजभाषा छत्तीसगढ़ी को बढ़ावा देने का प्रेरणा देते रहे बल्कि इनकी कविताएं लोगों को जीवन जीने की सीख भी देते रहे हैं । आज न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरा विश्व डॉ सुरेंद्र दुबे के निधन की खबर पाकर स्तब्ध रह गए और इनकी निधन को कईयों ने अपनी व्यक्तिगत नुकसान बताते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए हैं लेकिन सच्चाई तो यह है कि आज छत्तीसगढ़ का महान हास्य कवि डॉ सुरेंद्र दुबे के दुनिया से चले जाने से छत्तीसगढ़ ने अपने होनहार माटी पुत्र को खोया हैं अपितु पूरी कवि, पत्रकार, साहित्यकार अपने मार्गदर्शक को खोया हैं। निश्चित रूप से हम डॉ सुरेंद्र दुबे की क्षति की भरपाई नहीं कर सकते हैं लेकिन जिस तरह से इन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को लेकर अपनी बात हर मंच पर खुलकर करते रहे और अपनी कविताओं के बदौलत छत्तीसगढ़ी भाषा और छत्तीसगढ़ की विश्व में एक नई पहचान दिलाई है,उसे हम नहीं भूल सकते हैं। छत्तीसगढ़ी भाषा की महान हास्य कवि डॉ सुरेंद्र दुबे भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं पर उनकी छत्तीसगढ़ी भाषा और छत्तीसगढ़ियों की विकास की सोच है उसे हम छत्तीसगढ़ियों को जात पात से ऊपर उठकर पूरा करना चाहिए तभी हम अपने महान हस्ती पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को सच्ची श्रद्धांजलि दे पाएंगे। पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे की जीवन पर बहुत कुछ लिखा जा सकता है लेकिन अखबार की पेज भरने से कहीं ज्यादा जरूरी यह है कि हम डॉ सुरेंद्र दुबे की बातों का अनुसरण करें और हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ी भाषा और छत्तीसगढ़ियों के विकास पर जोर दें। सर्वव्यापी परिवार छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के प्रथम सचिव, छत्तीसगढ़ी के महान हास्य कवि, पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं…!