महिला ने फर्जी पहचान पत्र के सहारे, विवाह, ब्लैकमेलिंग और शोषण के आरोप लगाकर युवक पर करवाया एफआईआर…पीड़ित युवक ने मुख्य न्यायाधीश और एसपी को ज्ञापन देकर की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग…प्रेस क्लब को लिखी चिट्ठी… पढ़े खास खबर कैसे हो रहा है कानून का दुरुपयोग।

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विकास नंद/ सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य में जिस तरह से महिला कानून की धज्जियां उड़ाई जा रही और बिना जांच पड़ताल के एफआईआर दर्ज किए जा रहे हैं,उसकी कई उदाहरण देखने को मिल जाएगा लेकिन बीते सप्ताह ही बिलासपुर की महिला थाना द्वारा एक मामले पर किए गए जुर्म दर्ज अपने आप में पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। बिलासपुर महिला थाना ने वरिष्ठ पत्रकार पर 2013 से एक महिला के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहकर शादी करने का झूठा वादा कर अनाचार करने का आरोप पर एफआईआर दर्ज किया गया है। जबकि एफआईआर दर्ज कराने वाली महिला के सारे दस्तावेज में पति के रुप में वरिष्ठ पत्रकार का नाम अंकित है और बीते 2013 से लिव इन रिलेशनशिप में रहना मतलब अपनी सहमति से वरिष्ठ पत्रकार के साथ महिला का प्रतीत होता है लेकिन महिला थाना द्वारा दर्ज किए गए एफआईआर पुलिस को कटघरे में खड़ा कर किया है। कराया है। वहीं बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार ने तमाम दस्तावेजों के साथ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा, राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, गृह एवं जेल विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक डॉ संजीव शुक्ला, एसएसपी रजनेश सिंह और प्रेस क्लब के अध्यक्ष इरशाद अली,पूर्व अध्यक्ष विरेन्द्र गहवई को ज्ञापन सौंपकर बताया कि जिस महिला ने उन पर अनाचार का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज किए हैं,वह अपने दस्तावेजों में अपना पति बताया है। पूर्व में संदर्भित पत्रों एवं संलग्न पत्रों के माध्यम से 2015 से पूर्व राज्यपाल, पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से लेकर राज्य सरकार एवं जिला पुलिस प्रशासन के उच्चाधिकारियों को ज्ञापन पत्र सौंपकर वर्तमान लोखंडी रोड मंगला थाना सिविल लाईन द्वारा अपने सरकारी दस्तावेजों जैसे कि आधार कार्ड, राशन कार्ड, गैस कार्ड यहां तक बैंक खाते में अपने पति के जगह में इनका नाम पति के रूप में अंकित कराया गया। जिस की जानकारी होने पर शिकायत कर कार्यवाही की मांग की गई और उक्त दस्तावेजों के सहारे उक्त महिला ने वरिष्ठ पत्रकार को हर जगह पति बताया और इनसे 2015 से मई 2025 तक 10-15 हजार रूपये यहां तक अन्य खर्चे के लिए रूपये लेती रही जिसे महिला कानून की एकतरफा कार्यवाही की डर से अपने मान-सम्मान बचाने के लिए देते रहा क्योंकि उक्त महिला वरिष्ठ पत्रकार को लगातार दैहिक शोषण, अनाचार करने के झूठे मामले पर फंसाने की लगातार धमकी देते रही और बीते एक वर्षो से 30-35 लाख रूपये का मकान खरीदकर नहीं देने पर दैहिक शोषण को लेकर एफ.आई.आर. दर्ज कराने की धमकी देते रही है और आखिरकार उक्त मांग पूर्ण नहीं करने पर वरिष्ठ पत्रकार के खिलाफ महिला थाना मे लिव इन रिलेशनशिप में रहकर शादी का झूठा वादा कर 2013 से 24 मार्च 2025 तक मतलब 12 वर्षो तक अनाचार करने का आरोप लगाकर अपराध पंजीबद्ध कराया गया, जो कि पूर्ण रूप से झूठा प्रतीत होती है।उक्त पूरे प्रकरण की दस्तावेज के आधार पर निवेदन करते हुए इनके खिलाफ दर्ज एफ.आई.आर. को निरस्त कर वरिष्ठ पत्रकार की स्वच्छ छवि को धूमिल करने एवं पुलिस प्रशासन द्वारा इनके पूर्व शिकायतों पर कार्यवाही न करने पर न्यायसंगत कार्यवाही करने की मांग करते हुए कहा है कि उक्त महिला द्वारा अपने तमाम सरकारी दस्तावेजों मे उन्हें पति बताया है, ऐसी स्थिति में दस्तावेजों के आधार पर अपराध पंजीबद्ध कराने वाली महिला का वह पति है तो फिर इन पर 12 वर्षो तक शादी का झूठा वादा कर अनाचार का अपराध पंजीबद्ध होना नहीं बनता है। उक्त महिला द्वारा इन्हें पति बताकर पूर्व में महिला थाना बिलासपुर में शिकायत प्रस्तुत कर समझाइस देने का आवेदन दिया गया था। वरिष्ठ पत्रकार की शिकायतों पर सिरगिट्टी एवं सिविल लाइन थाना बिलासपुर ने शिकायत पर निष्पक्ष जांच न कर फैना काटकर माननीय न्यायालय की शरण में जाने की सलाह दे दी । उक्त महिला ने इन पर घर से मारपीट कर भगा देने का आरोप लगाया है, जबकि उस दिन दिनांक 13.06.2025 को घर में वरिष्ठ पत्रकार और और इनके पिता जी नहीं थे। उक्त महिला घर में घूसकर साथ रहने की बात कही। इस पूरे मामले की शिकायत इनकी पत्नी ने सिरगिट्टी थाना, बिलासपुर में तत्काल की जिस पर थाना सिरगिट्टी ने मेरी पत्नि को फैना काटकर न्यायालय की शरण में जाने की सलाह दी गई और इनके घर से महिला को सिरगिट्टी पुलिस ने अपने साथ उठाकर ले गया। महिला थाना बिलासपुर में अपराध पंजीबद्ध किए जाने से पहले वरिष्ठ पत्रकार को उक्त महिला की शिकायत की जानकारी नहीं दी गई और न ही इनसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। जबकि सबको ज्ञात है कि महिला मामले में दोनो पक्षों को समझाईश देने बुलाए जाते है पर इनके साथ ऐसा नहीं किया गया। उक्त महिला द्वारा पूर्व में अपने पूर्व पति एवं ससुराल पक्ष वालों पर जो थाना जैजैपुर में भादवि. 498 सहित अन्य धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध करा चुकी है‌ । इससे यह प्रतीत होता है कि उक्त महिला द्वारा इनके खिलाफ 2013 से मार्च 2025 तक शादी का झूठा वादा कर अनाचार करने को लेकर महिला थाना बिलासपुर में बी.एन.एस. की धारा 69,296,351, 151 के तहत किए गए अपराध पंजीबद्ध बेबुनियाद और मनगढ़ंत कहानी बनाकर लिखाई गई है,जिसे निरस्त कर न्यायसंगत कार्यवाही करने की मांग करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ने अपने चिट्ठी में लिखा है कि क्योंकि उक्त दस्तावेजों के आधार पर महिला ने उसे अपना पति माना है और पूर्व में महिला थाना बिलासपुर में इन्हें पति बताकर शिकायत भी किया है और 12 वर्षो तक अपनी सहमति से लिव इन रिलेशनशिप में रही है। इनकी मांग पूर्ण नहीं होने पर इनके विरूद्ध बेबुनियाद, झूठा एफ.आई.आर. दर्ज किया गया प्रतीत होती है। वहीं इस तरह के कई मामले में माननीय छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, उच्चतम न्यायालय भारत सरकार द्वारा फैसला सुनाते हुए महिला, युवतियों द्वारा अपने करीबी रिश्तेदारों, प्रेमिकाओं पर अनाचार, दैहिक शोषण के मामलो को सहमति से शारीरिक संबंध बनाने एवं मांग पूर्ण नहीं होने पर इस तरह का आरोप लगाया जाने को निराधार बताते हुए आरोपियों को बाइज्जत बरी की गई है। इनके खिलाफ दर्ज अपराध को निरस्त कर न्यायसंगत कार्यवाही की प्रार्थना करते हुए कहा कि, उन्हें न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है कि तत्काल न्याय मिलेगी। बहरहाल देखना है कि इस पूरे मामले पर क्या निर्णय मिलेगा।


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