विकास नंद/ सर्वव्यापी/

विकासखंड सरायपाली (जिला महासमुंद) में शिक्षक नियुक्ति एवं स्थानांतरण को लेकर गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए शिक्षा संचालनालय रायपुर को शिकायत पत्र भेजा गया है। शिकायत में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) प्रकाशचंद मांझी पर नियमों की अनदेखी कर मनमानी करने का आरोप लगाया गया है। मामले में दोषियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की गई है।
शिकायत में उठाए गए प्रमुख बिंदु –
1. आवश्यकता से अधिक पदस्थापन:आदिवासी कन्या आश्रम छुईपाली में दर्ज संख्या मात्र 43 है, इसके बावजूद वहां तीन शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई। जबकि नियम के अनुसार 60 से कम छात्र संख्या वाले संस्थानों में तीन शिक्षकों की नियुक्ति की अनुमति नहीं है।
2. अलग-अलग परिसर के दो विद्यालयों की अनुचित मर्जर प्रक्रिया:शासकीय प्राथमिक शाला बालसी और पैकिन को उनके ही परिसर में स्थित शासकीय उच्च प्राथमिक शालाओं में मर्ज कर दिया गया। यह स्पष्ट रूप से युक्तियुक्तकरण नियमों का उल्लंघन माना गया है।
3. घर के पास मनमाफिक पदस्थापना:शा.प्रा.शाला कोंकड़ी (बाराडोली) को मर्ज किए जाने के बावजूद संबंधित शिक्षक को बीईओ मांझी के गृह ग्राम से महज 1 किमी दूर स्थित शा.प्रा.शाला डूमरपाली में पदस्थ किया गया, जिससे पक्षपात की आशंका जताई गई है।
बीईओ का पक्ष –इस पूरे मामले पर सरायपाली के विकासखंड शिक्षा अधिकारी प्रकाशचंद मांझी ने सफाई देते हुए कहा कि सभी पदस्थापन शासन के निर्देशानुसार युक्तियुक्तकरण के तहत किए गए हैं।
उन्होंने तीन बिंदुओं में अपनी बात स्पष्ट करते हुए बताया कि –1. आश्रम शाला की अधीक्षक को अतिशेष से मुक्त रखने का स्पष्ट निर्देश था, इसलिए वह श्रेणी में नहीं आतीं।
2. कम दर्ज संख्या और न्यूनतम दूरी जैसे मापदंड जहाँ लागू होते हैं, केवल उन्हीं स्थानों पर मर्जर प्रक्रिया की गई।
3. एक ही परिसर में संचालित स्कूलों का युक्तियुक्तकरण पूरी तरह शासन के नियमानुसार हुआ है।
आरोप और स्पष्टीकरण के बीच जांच की मांग शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि बीईओ द्वारा की गई पदस्थापन प्रक्रिया में व्यक्तिगत हित और पक्षपात किया गया है।
युक्तियुक्तकरण की आड़ में कथित रूप से नियमों का दुरुपयोग किया गया है। इसलिए शिक्षा संचालनालय रायपुर को पत्र लिखकर जांच और आवश्यक कार्यवाही की मांग की गई है।
फिलहाल पूरे मामले में जांच लंबित है और आगामी समय में ही यह स्पष्ट होगा कि युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया वास्तव में नियमों के अनुसार हुई या फिर इसके पीछे कोई पर्दे के पीछे का खेल छिपा है।