कवर्धा/ चेतन साहू/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में भाजपा की विष्णु देव साय सरकार को सत्ता में आए 18 महीने पूरे होने को हैं, लेकिन अब तक मंत्री मंडल का पूर्ण विस्तार नहीं हो सका है। यह स्थिति न केवल चिंताजनक है बल्कि भाजपा की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर रही है। कांग्रेस शासनकाल में नियुक्तियों को लेकर आवाज उठाने वाली भाजपा, अब खुद की सरकार में महत्वपूर्ण आयोगों और बोर्डों में नियुक्ति करने से चूक रही है।विशेष रूप से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग की नियुक्ति अब तक लंबित है। कांग्रेस सरकार के दौरान इस आयोग की निष्क्रियता को लेकर भाजपा ने लगातार हमला बोला था, लेकिन अब सत्ता में आने के डेढ़ साल बाद भी इस आयोग की जिम्मेदारी सौंपने में असफल रही है।
इस चुप्पी पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष किरण सिंह देव को जवाब देना चाहिए कि आखिरकार नियुक्ति में देरी क्यों हो रही है?हाल ही में मैनपाट में आयोजित तीन दिवसीय भाजपा चिंतन शिविर में मंत्रिमंडल विस्तार और शेष बचे निगम-मंडलों में नियुक्ति की बातों को बल मिला था। यहां तक कहा गया कि गुरु पूर्णिमा या सावन के पहले दिन बड़े निर्णय लिए जाएंगे। लेकिन 14 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले भी कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। इससे राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि अब शायद मंत्री मंडल विस्तार कभी नहीं होगा।
राजनीतिक गलियारों से यह खबरें भी आ रही हैं कि शेष बचे निगम, मंडल, आयोग और मुख्यमंत्री सलाहकार के पदों के लिए नामों की सूची भाजपा संगठन द्वारा तैयार कर मुख्यमंत्री को सौंपी जा चुकी है। बावजूद इसके, सीएम हाउस में फाइलें धूल खा रही हैं। हर बार “आज-कल” के आश्वासन से दावेदारों की उम्मीदें अब टूटने लगी हैं।भाजपा सरकार की इस अनिर्णय की स्थिति से न केवल जनता, बल्कि पार्टी कार्यकर्ता और संगठन के भीतर भी असंतोष पनप रहा है।
अब समय की मांग है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पार्टी नेतृत्व जिम्मेदारी लेते हुए जल्द से जल्द मंत्री मंडल विस्तार, संसदीय सचिवों की नियुक्ति और शेष बचे निगम-मंडल-आयोगों में नियुक्तियां करें।यदि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना चाहती है, तो अगले तीन वर्षों में कार्यकुशल और जवाबदेह नेतृत्व देने के लिए यह नियुक्तियां अत्यंत आवश्यक हैं। अन्यथा, जनता को जवाब देने में पार्टी को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।