राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में रमेश बैस का नाम चर्चा में*

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सात बार के सांसद और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल रमेश बैस इन दिनों भाजपा की सक्रिय राजनीति में दिखाई पड़ रहे हैं,जिन्हें अब तक छत्तीसगढ़ भाजपा संगठन ने कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी है लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि राजनीतिक की दल दल में भी साफ सुथरी छवि वाले वरिष्ठ भाजपा नेता रमेश बैस को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने चाहा तो भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी जा सकती है। जिसे लेकर केंद्र की मोदी सरकार भी इंकार नहीं कर सकते हैं। राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि रमेश बैस ऐसे व्यक्ति हैं जो एक पार्षद से लेकर केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल तक की सफर तय किए हैं परंतु इन एक रुपये का दाग़ नहीं लगा है और न ही किसी अन्य मामले पर इन पर दाग लगा है। छत्तीसगढ़ राज्य बनने में रमेश बैस की अहम् भूमिका को छत्तीसगढ़ के लोग हमेशा याद करते हुए कहते हैं कि अगर छत्तीसगढ़ में रमेश बैस नहीं होते तो राज्य निर्माता अटल बिहारी वाजपेई जी इसे मध्य प्रदेश से अलग करके छत्तीसगढ़ राज्य नहीं बनाते हैं, इसलिए रमेश बैस को छत्तीसगढ़ का शिल्पकार भी कहा जाता है। मोदी सरकार बनते ही रमेश बैस को। त्रिपुरा, झारखंड और फिर महाराष्ट्र का राज्यपाल बनाया गया और महाराष्ट्र के राज्यपाल से सेवानिवृत्त होने के पश्चात पुनः भाजपा की सक्रिय सदस्य बने और सक्रिय राजनीति में रमेश बैस लगातार नजर आ रहे हैं और खुलकर कहते हैं कि वह अभी सामान्य सदस्य हैं, संगठन में किसी पद पर नहीं है। भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी जो जिम्मेदारी देंगे उसे वह जरुर स्वीकार कर निभायेंगे। वहीं छत्तीसगढ़ की राजनीतिक पंडितों का कहना है कि रमेश बैस को भाजपा केंद्र या छत्तीसगढ़ राज्य का प्रदेशाध्यक्ष बनाते हैं तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। माना जा रहा है कि रमेश बैस की स्वच्छ छवि को देखते हुए इन्हें केंद्रीय राष्ट्रीय बनाएंगे। बहरहाल यह खबर सर्वव्यापी ने राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चा पर लिखी है।


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