हज मुकम्मल कर उड़ान से वतन वापस,पेंड्रा रोड स्टेशन पर हाजी रफीक अहमद(कल्लूभाई),पत्नि अजरा कौशर का जोरदार स्वागत किया गया।

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नूर मोहम्मद गौरेला पेंड्रा मरवाही/(सर्वव्यापी)/

इस बार भारत से1 लाख 75 हजार से ज्यादा लोग हज के लिए मक्का पहुंचे, जिनके लौटने का सिलसिला शुरू हो चुका है,हमारे छत्तीसगढ़ से इस वर्ष कुल 659 हज यात्रियों ने हज 2025 की सआदत हासिल की जिसमें कुल 349 पुरुष व 310 महिला हज यात्री शामिल रहे। गौरेला के टीकर से फैज बाग़ के ओनर रफीक अहमद (कल्लू भाई) उनकी पत्नी अजरा कौसर का पेंड्रा रोड रेल्वे स्टेशन व फिरोज खान अंजुमन कमेटी टीकर कला(पूर्व सदर) प्रॉपर्टी डीलर के घर पर हाजियों का इस्तकबाल शानदार तरीके से गुलदस्ता,फूल माला पहनाकर जोरदार स्वागत किया गया। हज यात्रा से लौटे हाजियों के चेहरों पर सुकून और खुशी की झलक साफ देखी जा सकती हैं।हज के अरकान और वहां के अनुभवों का जिक्र करते ही उनकी आंखों में आंसू और दिल में एक अद्भुत शांति का एहसास हो रहा है। हाजियों के लिए यह सफर केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि एक आत्मिक अनुभूति का सफर था। काबा की तरफ रुख करके मैंने अब तक नमाज अदा की पर जब काबा पर मेरी पहली नज़र पड़ी वों कैफियत,तवाफ का वह दृश्य,मक्का में सफा और मरवा नामक दो पहाड़ियों के बीच सात बार चक्कर लगाना और मदीना की पवित्र जमीं पर मेरा पहला कदम रखना, रोज़ा-ए-रसूल पर जाते हैं, वे सुनहरी जाली के सामने खड़े होकर ताजदारे मदीना को सलाम पेश करना यह सब मेरे दिलों में एक गहरा असर छोड़ गया, शायद मैं इन्हें शब्दों में बयां नहीं कर सकता सिर्फ उस पलों का मैं एहसास कर सकता हूँ, हज के दौरान मिली अल्लाह की बख्शीश और उन पवित्र लम्हों की यादें उनके जीवन का सबसे बेश कीमती खजाना बन गया हैं। इस मुकद्दस यात्रा ने उन्हें न केवल आध्यात्मिक रूप से सशक्त किया, बल्कि उनके दिलों में एक नयी सुकून और शांति का संचार किया।


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