विकास नंद/सर्वव्यापी/
राज्यपाल एवं विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति रमेन डेका ने आज प्रदेश के समस्त शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की समीक्षा बैठक ली। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए रिक्त पदों पर शीघ्र भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि समय पर नियुक्तियां और प्रमोशन न होने से शैक्षणिक स्तर प्रभावित होता है और योग्य शिक्षकों को आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिल पाता।
राजभवन स्थित कांफ्रेंस हॉल में आयोजित इस बैठक में डेका ने स्पष्ट किया कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि स्थाई रजिस्ट्रार की नियुक्ति, आवश्यकतानुसार पाठ्यक्रमों की संख्या में वृद्धि और NEP (नई शिक्षा नीति) के प्रभावी क्रियान्वयन से ही छात्र संख्या और शैक्षणिक गुणवत्ता दोनों में वृद्धि संभव है।राज्यपाल ने डीन स्टूडेंट वेलफेयर को सक्रिय करने, छात्रों की शिकायतों के त्वरित निराकरण, और सोशल मीडिया के इस युग में तनाव प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों से NEC (नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल) ग्रेडिंग प्राप्त करने की दिशा में कार्य योजना तैयार करने को कहा।
डेका ने कहा कि प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए टीचिंग स्टाफ को तुरंत वापस बुलाया जाए, जिससे कक्षाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें। बैठक में उन्होंने कृषि विश्वविद्यालय को किसानों को लाभकारी फसलों की ओर प्रेरित करने और टमाटर जैसे खराब होने वाले उत्पादों के लिए प्रभावी विपणन प्रणाली विकसित करने के निर्देश दिए। उद्यानिकी विश्वविद्यालय को स्व-सहायता समूहों के साथ मिलकर कार्य करने का सुझाव भी दिया गया।राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों को हर वर्ष एलुमिनाई मीट आयोजित करने, कॉलेजों का आकस्मिक निरीक्षण करने, और प्राचार्यों के साथ वर्ष में दो बार बैठक करने को कहा। उन्होंने कहा कि रिसर्च एवं डेवलपमेंट पर विशेष ध्यान देने और तकनीकी व व्यवसायिक विश्वविद्यालयों में नवाचार व स्टार्टअप को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।
बैठक की शुरुआत में राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना ने समीक्षा के मुख्य बिंदुओं की जानकारी दी। विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने बारी-बारी से प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए। बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त डॉ. संतोष देवांगन, राजभवन उप सचिव हिना अनिमेष नेताम, और सभी शासकीय विश्वविद्यालयों के कुलपति उपस्थित रहे।
यह बैठक न केवल विश्वविद्यालयों के संचालन में पारदर्शिता और गुणवत्ता लाने की दिशा में अहम रही, बल्कि इससे प्रदेश की उच्च शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक बदलाव की उम्मीद भी जताई जा रही है।