तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
राजनांदगांव नगर निगम के पूर्व पार्षद हेमंत ओस्तवाल ने एक पत्र के माध्यम् से यह कहा कि मधुसूदन यादव के संरक्षण में भष्ट्राचार और शासन के नियम के विरूद्ध कार्य करने के मामले में बोलने के लिए 56 इंच के सीने की जरूरत है और फुल छाप कांग्रेसी जो है वे कभी भी मधुसूदन यादव के भ्रष्ट्राचार के खिलाफ नहीं बोलेगें उसका ताजा प्रमाण सडक़ डामरीकरण है और वही दुसरी ओर 210 करोड़ रूपयें अमृत मिशन योजना भष्ट्राचार के चलते फैल हो गई और वही 16 करोड़ के बुढ़ासागर सौदर्यीकरण के भष्ट्राचार में एफ.आई.आर कराने का निर्णय 25 अगस्त 2022 की सामान्य सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था। लेकिन आज तक जनहित के लिए ना तो सत्ताधारी महापौर मधुसूदन यादव की नीद खुल रही है और ना ही पाँच वर्षों तक कांग्रेस सत्ता की मलाई खाने वाले पूर्व महापौर हेमादेश्मुख की नीद खुल रही है आखिर इस पूरे भ्रष्ट्राचार में किसकी संलिप्ता है उसको जनता के सामने लाया जाये ओस्तवाल ने राजनांदगांव जिले के कलेक्टर एंव छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी से यह माँग की है कि जहाँ भाजपा की सरकार के मुखिया यह कह रहे है कि सुशासन की सरकार भाजपा ही देगी और जहाँ एक ओर डॉ रमन सिंह जी के विधानसभा क्षेत्र मेें लगभग 10 करोड़ की लागत की सडक़ डामरीकरण में निगम सीमा में जो खुले आम भ्रष्ट्राचार एवं गुणवत्ताहीन निर्माण करने वाले ठेकेदारों और निगम के उन भ्रष्ट्र जवाबदार इंजीनियर और कार्यपालन अभियंता को जो संरक्षण निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा और महापौर मधुसूदन यादव जो दे रहे है उससे ऐसा लगता है कि निगम आयुक्त और महापौर मधुसूदन यादव ने सडक़ ठेकेदारों से कमीशन के रूप में मोटी रकम ले ली है? इसलिए जनहित और शासनहित में आज तक सडक़ ठेकेदार और निगम के जवाबदार भ्रष्ट्र सब इंजीनियर आदि को बचाया जा रहा है क्यों? जबकि प्रदेश के मुखिया और नगरीय प्रशासन मंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि गलत कार्य करने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जाय लेकिन भाजपा की कथनी और करनी एक समान नहीं है इसलिए प्रदेश के मुख्यमंत्री से अनुरोध है कि, जिले के कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश देवे की निगम आयुक्त और महापौर इस सडक़ डामरीकरण के गुणवत्ताहीन निर्माण कार्य करने वाले ठेकेदारों और निगम के जवाबदार अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही नहीं कर रहे है तो आप इस पूरे मामले की लोक निर्माण विभाग या आर.ई.एस. विभाग से इस पूरे मामले की जाँच एक सप्ताह के भीतर करवाकर सभी दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की जायें।