छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सुनवाई : महिलाओं को दिलाया न्याय, भरण-पोषण व मानसिक उपचार के दिए निर्देश।

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संवाददाता /रायपुर/

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग द्वारा आज राजधानी रायपुर स्थित कार्यालय में महिला उत्पीड़न से संबंधित विभिन्न प्रकरणों की सुनवाई की गई। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक, सदस्य सरला कोसरिया एवं लक्ष्मी वर्मा ने पीड़ित महिलाओं की शिकायतों पर गंभीरता से विचार करते हुए त्वरित न्याय के लिए महत्त्वपूर्ण निर्देश दिए।मानसिक रोगी पति के इलाज और भरण-पोषण का आदेश एक मामले में आवेदिका ने बताया कि उसका विवाह झूठ बोलकर मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति से कराया गया। पिछले सात वर्षों से उसके पिता ने पति का इलाज और भरण-पोषण किया है, जबकि ससुराल पक्ष ने कोई सहयोग नहीं दिया। आयोग ने पति के इलाज हेतु मानसिक रोग चिकित्सालय, सेंद्री (बिलासपुर) को अनुशंसा पत्र भेजने का निर्णय लिया है। साथ ही, पति के इलाज की अवधि में ससुराल पक्ष को 6 माह के लिए 12 हजार रुपये भरण-पोषण देने के निर्देश दिए गए। अंतिम निर्णय 6 माह बाद चिकित्सा रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।दो बेटियों के बाद बदला व्यवहार, एफआईआर की सलाहएक अन्य मामले में आवेदिका ने बताया कि दो बेटियों के जन्म के बाद ससुराल पक्ष ने प्रताड़ित करना शुरू किया और पति ने षड्यंत्रपूर्वक उसे मानसिक रोगी बताकर जबरन दवा देने की कोशिश की। बेटियों को छीनकर आवेदिका को घर से निकाल दिया गया। आयोग ने आवेदिका को एफआईआर दर्ज कराने का अधिकारिक निर्देश देते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया।

पुलिस आरक्षक पति देगा हर माह ₹15,000एक अन्य प्रकरण में आवेदिका को विवाह के 15 दिन बाद ही घर से निकाल दिया गया। अनावेदक वर्तमान में तेलीबांधा थाना में पदस्थ है और 40 हजार रु. मासिक आय होने के बावजूद कोई सहायता नहीं कर रहा है। आयोग ने आदेश दिया कि वह आवेदिका को विवाह का सामान लौटाए एवं प्रति माह 15 हजार रुपये भरण-पोषण प्रदान करे। इस मामले की निगरानी स्वयं आयोग करेगा।पोते की परवरिश को लेकर सास की याचिका एक प्रकरण में सास ने बहू और पोते को अपने साथ रखने की मांग की। बहू ने बच्चे को माता-पिता के पास छोड़ रखा है, जबकि स्वयं आर्थिक रूप से असमर्थ हैं। आयोग ने दोनों पक्षों को आपसी सहमति से तलाक के लिए समझाइश दी। साथ ही, बच्चे के संरक्षण के लिए पिता को कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी गई।

मामला इस स्तर पर नस्तीबद्ध किया गया।आदेश की अवहेलना पर नौकरी से निलंबन की चेतावनी एक अन्य मामले में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक (पति) रेलवे में कार्यरत है और पूर्व में आदेशित किए जाने के बावजूद भरण-पोषण नहीं दे रहा है। साथ ही, पत्नी और पुत्री का नाम सेवा पुस्तिका में भी दर्ज नहीं किया गया है। आयोग ने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में आदेश का पालन नहीं किया गया तो डी.आर.एम. को पत्र भेजकर अनावेदक के निलंबन की अनुशंसा की जाएगी।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की इन सुनवाइयों ने एक बार फिर साबित किया कि महिला सशक्तिकरण और न्याय की दिशा में आयोग पूरी संवेदनशीलता और संकल्प के साथ कार्य कर रहा है।

महिलाओं की समस्याओं को न केवल सुना गया, बल्कि उन्हें समाधान की दिशा में ठोस मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया।


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