तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की सियासत एक बार फिर गर्म है भाजपा सरकार के गठन के बाद से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और एसीबी द्वारा की जा रही कार्रवाई कांग्रेस शासनकाल के मंत्रियों, विधायकों, पदाधिकारियों और कुछ अफसरों के इर्द-गिर्द घूम रही है।
भाजपा इसे भ्रष्टाचार पर करारा प्रहार बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित कार्रवाई करार दे रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तो केंद्र सरकार और उद्योगपतियों के गठजोड़ का आरोप लगाते हुए खुले मंच से कह चुके हैं कि छत्तीसगढ़ को “बेचने” का प्रयास किया जा रहा है। परंतु इन आरोप-प्रत्यारोपों से हटकर यदि जनता की भावनाओं की बात की जाए तो वह यह कहती नजर आ रही है कि अब राजनीतिक बहस नहीं, विकास चाहिए।
जनता ने भाजपा को दोबारा मौका इसलिए दिया क्योंकि वह अटल बिहारी वाजपेयी की उस सोच को नहीं भूली, जिन्होंने छत्तीसगढ़ को राज्य का दर्जा दिया। जनता ने रमन सिंह को लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन अंततः उनके कुछ मंत्रियों के अहंकार और कार्यशैली के चलते सत्ता से बेदखल कर दिया।
यही हाल खुद को ‘छत्तीसगढ़िया सरकार’ बताने वाले भूपेश बघेल की सरकार का भी हुआ।अब बारी है मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की। उनके नाम में “विष्णु” और धर्मपत्नी के नाम में “कौशल्या” जैसे पवित्र संकेतों से जनता उम्मीद लगाए बैठी है कि यह सरकार छत्तीसगढ़ को नई दिशा देगी।
हालांकि भाजपा की पिछली सरकार के कार्यकाल में सामने आए नान घोटाले जैसे गंभीर मामले आज भी लोगों की याद में हैं, और वर्तमान सरकार में भी भ्रष्टाचार की खबरें बाहर आ रही हैं।जनता स्पष्ट कह रही है कि अब सिर्फ विपक्ष पर कार्रवाई कर वाहवाही बटोरने से काम नहीं चलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उनकी टीम को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर, शेष तीन साल के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ के विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा।यह भी जरूरी है कि मुख्यमंत्री संगठनात्मक दृष्टि से भी अपनी सरकार को मजबूत करें।
अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है, न ही संसदीय सचिवों और शेष निगम-मंडल, आयोगों में नियुक्तियां हुई हैं। इसके कारण कार्यप्रणाली में ठहराव है, और यही बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जैसे संगठनों में असंतोष का कारण बन रही है।संघ के उच्च पदाधिकारियों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि सरकार में टीम भावना की कमी है और विष्णु देव साय को अब निर्णायक कदम उठाने होंगे।
नहीं तो भाजपा का यह कार्यकाल भी जनता की नजरों में सामान्य होकर रह जाएगा।कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए भ्रष्टाचार के कई मुद्दे उठाए, जैसे टीएस सिंहदेव द्वारा उजागर की गई “लाल डायरी”, लेकिन सत्ता में आने के बाद वे भी ठोस कार्रवाई नहीं कर सके।
अब भाजपा की बारी है — और यदि विष्णु सरकार इस अवसर को केवल राजनीतिक हमलों तक सीमित रखती है, तो यह जनता के विश्वास का अपमान होगा।
मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे एक मजबूत प्रशासनिक टीम बनाकर शेष कार्यकाल को सुशासन, पारदर्शिता और छत्तीसगढ़ के चहुँमुखी विकास के लिए समर्पित करें। तभी जाकर जनता उन्हें पुनः सिर आंखों पर बिठाएगी — और इतिहास में उनका नाम सच्चे छत्तीसगढ़ हितैषी के रूप में दर्ज होगा।
> यह रपट आम जनमानस, भाजपा कार्यकर्ताओं और संघ पदाधिकारियों के बीच चल रही चर्चाओं पर आधारित है। निर्णय और कार्रवाई मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हाथों में है — जनता अब सिर्फ़ वादे नहीं, परिणाम चाहती है।