तरुण कौशिक/ संपादक – सर्वव्यापी /
छत्तीसगढ़ की राजनीति इन दिनों असमंजस और अनिर्णय की स्थिति से गुजर रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार को लगभग 19 महीने पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अब तक न तो पूर्ण मंत्री मंडल का गठन हो पाया है और न ही संसदीय सचिवों की नियुक्ति संभव हो सकी है। यही कारण है कि भाजपा की यह सरकार जनमानस में अब तक कोई प्रभावी छवि नहीं बना सकी है।
राज्य की सियासी फिजा में यह सवाल अब जोर पकड़ने लगा है कि क्या मुख्यमंत्री विष्णु देव साय इस सप्ताह बहुप्रतीक्षित मंत्री मंडल विस्तार और संसदीय सचिवों की नियुक्ति कर पाएंगे या फिर “जल्द होगा” जैसे जुमलों से ही जनता को बहलाते रहेंगे?
सरकार में नेतृत्व का अभाव, संगठन मजबूत पर प्रशासन ढीला मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहचान एक सरल, सज्जन और ईमानदार नेता की रही है।
उनकी सरकार ने ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी कुछ जनकल्याणकारी योजनाएं जरूर चलाई हैं, लेकिन बाकी मोर्चों पर अब तक सरकार की पकड़ कमजोर ही नजर आई है।
प्रशासनिक कसावट, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व कौशल की स्पष्ट कमी दिखाई दे रही है।
राज्यपाल रामेन डेका के सक्रियता दिखाने से यह संदेश भी गया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से अपेक्षित निर्णय नहीं लिए जा पा रहे हैं।
भाजपा का संगठनात्मक स्तर पर सदस्यता अभियान जरूर सफल रहा है, लेकिन सरकार के स्तर पर ठोस फैसले न होना आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं दोनों में निराशा फैला रहा है।
भ्रष्टाचार पर कार्रवाई, लेकिन जनहित में खालीपन
भ्रष्टाचार के मामलों में ACB और ईडी को फ्री हैंड देने की बात जरूर कही जाती है, और कुछ मामलों में पूर्व कांग्रेस सरकार के नेताओं पर कार्रवाई भी हुई है।
मगर जनता को सीधे लाभ देने वाले जनहितकारी निर्णयों में सरकार सुस्त नजर आती है।
प्रशासनिक अमले में तालमेल की कमी और वरिष्ठ अफसरों की उदासीनता भी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
क्या नेतृत्व परिवर्तन की तैयारी?
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि विष्णु देव साय नेतृत्व को हटाकर किसी सशक्त चेहरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वरिष्ठ भाजपा नेताओं तक ने यह कहना शुरू कर दिया है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय न तो प्रशासनिक पकड़ बना सके और न ही जनता के बीच अपनी सरकार की योजनाओं की प्रभावी प्रस्तुति कर पाए। ऐसे में पार्टी के भीतर ही नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है।
तुलना में पिछड़े विष्णु, जोगी-रमन-भूपेश के सामने फीके अतीत के तीनों मुख्यमंत्रियों—अजीत जोगी, डॉ. रमन सिंह और भूपेश बघेल—की तुलना में विष्णु देव साय को अब तक कमजोर मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है।
जहां जोगी की प्रशासनिक पकड़, रमन की स्थिरता और भूपेश की राजनीतिक चतुराई ने राज्य में लंबा राज किया, वहीं विष्णु देव साय निर्णयों में असमर्थता और नेतृत्व में ढिलाई के लिए पहचाने जा रहे हैं।
निष्कर्ष: अब भी समय है, निर्णय लें या तैयार रहें परिवर्तन के लिएमुख्यमंत्री विष्णु देव साय के पास अब भी समय है कि वे अपने सादे और शांत छवि से बाहर निकलकर “रुद्र रूप” अपनाएं और निर्णायक नेतृत्व की मिसाल पेश करें। यदि मंत्री मंडल विस्तार, संसदीय सचिवों की नियुक्ति और प्रशासनिक कसावट में तेजी नहीं आई, तो आने वाले समय में नेतृत्व परिवर्तन की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।
अब पूरा छत्तीसगढ़ इस सप्ताह की ओर टकटकी लगाए देख रहा है — क्या वाकई में होगा मंत्री मंडल विस्तार, या फिर मुख्यमंत्री सिर्फ यही कहते रहेंगे – “इंतजार करिए, जल्द होगा…”