तरुण कौशिक/ संपादक/
छत्तीसगढ़ धरती आदिवासी संस्कृति, परंपरा अऊ रिती-रिवाज के जीवित गवाही देवत हे। जंगल, पहाड़, नदी-नाला ले जुड़ले हमर आदिवासी समाज सिरिफ राज्य के पहचान नई, बलकि भारत के धरोहर हावे। फेर, दुख के बात ये हावे के आज घलो आदिवासी मन के असली विकास म सरकार ह पिछड़त नज़र आवत हे।मुख्यमंत्री विष्णु देव साय खुद आदिवासी समाज ले आय हें, अऊ आदिवासी विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के नेतृत्व म राजधानी रायपुर म आदिवासी संग्रहालय बनाय गे हे। ये संग्रहालय म हमर आदिवासी मन के रहन-सहन, कला-कौशल, संस्कार अऊ इतिहास के खूब बखान करे गे हे। फेर सवाल ये उठत हे। सिरिफ दीवार म टंगाय फोटो अऊ शोकेस म रखाय पुरखा के सामान ले का विकास होही?गांव-गांव म आज घलो शिक्षा के अभाव, रोजगार के कमी, स्वास्थ्य सुविधा के दूरदशा अऊ जमीन-जंगल के हक ले वंचित होय के पीरा देखे जा सकत हे। सरकार ह योजना बनावत हे, घोषणा करत हे, फेर धरातल म असर कतको कम दिखथे।आदिवासी समाज के विकास सिरिफ भवन, मूर्ति अऊ म्यूज़ियम ले नई हो सकय । ये बर जरूरी हे के शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, परंपरागत हक अऊ सांस्कृतिक संरक्षण के दिशा म ठोस काम होय। आज जरूरत हे नीति अऊ नीयत के बीच के दूरी ला पाटे के, न कि सिरिफ दिखावा करे के।आदिवासी समाज ह सिरिफ संस्कृति के गहना नई, ये ह छत्तीसगढ़ के रीढ़ हावे ,अऊ जेन दिन ये रीढ़ मजबूत होही, तेन दिन राज्य असली विकास के राह म आगू बढ़ही।