प्राइवेट स्कूल संचालकों का शिक्षा विभाग पर आरोप, आरटीई स्वीकृति में देरी, अनावश्यक परेशानियों का आरोप।

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मुंगेली/जिया खान/ ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी/

जिले के प्राइवेट स्कूल संचालकों ने जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि शासन-प्रशासन की लापरवाही और मनमानी से स्कूल संचालक परेशान हैं। संचालकों का कहना है कि शिक्षा विभाग अब तक सभी स्कूलों में किताबों का पूरा वितरण नहीं कर पाया है, वहीं डिपो से कई बार स्कूलों को लौटाया जा रहा है। डिपो में पदस्थ कर्मचारियों के फोन तक रिसीव नहीं किए जा रहे।संचालकों का आरोप है कि आरटीई 2024-25 की स्वीकृति में अनावश्यक देरी की जा रही है। दाखिल-खारिज रजिस्टर, परीक्षा परिणाम पंजी और उपस्थिति पंजी कार्यालय में मंगाकर बार-बार जांच के नाम पर स्कूलों को परेशान किया जा रहा है। नोडल अधिकारी के आदेश का हवाला देकर “5 साल का बायोडाटा” जैसे अप्रासंगिक दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो आरटीई के नियमों में कहीं नहीं हैं।स्कूल संचालकों के अनुसार, जिले में आरटीई का भौतिक सत्यापन तीन से चार बार हो चुका है और नोडल अधिकारी ने इसे अप्रूव भी कर दिया है। फिर भी जिला शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को बारी-बारी से बुलाया जा रहा है और स्वीकृति रोकी जा रही है। उनका आरोप है कि छत्तीसगढ़ के किसी अन्य जिले में लागू न होने वाला नियम सिर्फ मुंगेली में लागू किया जा रहा है।संचालकों ने कहा कि डीपीआई रायपुर को प्रदेश के लगभग 24 जिलों का प्रामाणिकरण भेजा जा चुका है, लेकिन मुंगेली जिले का अभी तक कोई अता-पता नहीं है। इस देरी के कारण आशंका है कि जिले के स्कूलों को आरटीई की राशि 2-4 साल तक भी नहीं मिल पाएगी।आज सुबह 11 बजे गांधी पुतला, कलेक्ट्रेट मुंगेली में प्राइवेट स्कूल संचालक एकत्र होकर जिला शिक्षा अधिकारी और संबंधित अधिकारियों से मिलकर समस्या के समाधान की मांग करेंगे।


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