प्राचार्य, जो प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ निभा रहे शिक्षक का मूल धर्म।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

आज के समय में जब कई प्राचार्य केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित हो जाते हैं, वहीं बिलासपुर शहर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, राजेंद्र नगर के प्राचार्य डॉ. एम. एल. पटेल इस परंपरा से अलग मिसाल पेश कर रहे हैं।डॉ. पटेल का शिक्षा विभाग में लंबा अनुभव है, वे लगभग 6 वर्ष बिल्हा विकासखंड में और करीब 3 वर्ष कोटा विकासखंड में विकासखंड शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ रहे। इसके बाद पिछले तीन वर्षों से वे राजेंद्र नगर विद्यालय के प्राचार्य के रूप में सेवा दे रहे हैं।लंबे समय तक अधिकारी पद पर रहने के बावजूद उन्होंने अपने मूल कर्तव्य शिक्षण को नहीं छोड़ा। आज भी वे प्रतिदिन दो विषयों की कक्षाएं लेकर विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक बताते हैं कि,ऐसे प्राचार्य अब कम ही मिलते हैं, जो प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ विद्यार्थियों के बीच भी समय बिताते हैं।स्वयं डॉ. पटेल बताते हैं कि मेरी पहली नियुक्ति मध्यप्रदेश में व्याख्याता के रूप में हुई थी। शिक्षक होना ही मेरा मूल कार्य है। पढ़ाना-लिखाना मुझे संतोष देता है, और यही मुझे अपने पेशे से जुड़े रहने का अवसर देता है।शायद यही कारण है कि विद्यालय के विद्यार्थी भी अपने “पटेल सर” का क्लास लेने के लिए खुद उन्हें बुलाने आते हैं। प्रशासनिक अनुभव और शिक्षण के प्रति लगाव डॉ. एम. एल. पटेल ने दोनों को संतुलित करते हुए एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है।


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