नई ऊँचाइयों पर ले जाने का संकल्प लेकर काम कर रही महिला कलेक्टर दिव्या।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा की तेजतर्रार और परिणाम-केन्द्रित अधिकारी दिव्या उमेश मिश्रा वर्तमान में बालोद जिले की कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उनकी पहचान एक ऐसे प्रशासनिक अधिकारी के रूप में है, जो न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन में सक्रिय हैं बल्कि जमीनी हकीकत को समझकर नीतियों को जन-जन तक पहुँचाने में भी माहिर हैं।बालोद की महिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा का करियर विविध और समृद्ध अनुभवों से भरा है। उन्होंने बिलासपुर में एसडीएम के रूप में प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया, जहाँ त्वरित निर्णय क्षमता और संवेदनशीलता के चलते उन्हें जनता का भरोसा मिला। इसके बाद लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक पद पर रहते हुए उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, संसाधनों का बेहतर वितरण और नवाचार आधारित योजनाओं के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।इसके अलावा पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के निज सचिव के रूप में काम करते हुए उन्होंने राज्यस्तरीय नीति-निर्माण और मंत्रालय स्तर के समन्वय का अनुभव प्राप्त किया, जो आज बालोद में उनके प्रशासनिक निर्णयों की मजबूती का आधार है।वहीं बालोद जिले में पदभार संभालने के बाद से दिव्या उमेश मिश्रा की कार्यशैली स्पष्ट, पारदर्शी और नतीजों पर केन्द्रित रही है। कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा लगातार गाँव-गाँव जाकर योजनाओं की स्थिति का आकलन करती हैं, जिससे प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद बनता है।वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना, मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना, जल जीवन मिशन, और ग्रामीण सड़क योजना जैसे कार्यक्रमों को गति दी।कलेक्टर दिव्या, ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए आजीविका मिशन और हस्तशिल्प/कुटीर उद्योगों को बढ़ावा दिया।वहीं स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और पोषण आहार वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कड़ी निगरानी रखी। जिले में डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया, जिससे विकास कार्यों की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव हुई।इसके साथ ही सामुदायिक सहभागिता से वर्षा जल संचयन और स्वच्छता अभियान को जन-आंदोलन का रूप दिया। किसानों को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़ने के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करवाए।बालोद, जो एक कृषि प्रधान और आंशिक रूप से आदिवासी बहुल जिला है, वहाँ संसाधनों की सीमितता, बेरोजगारी, और बुनियादी ढाँचे की चुनौतियाँ मौजूद हैं। दिव्या उमेश मिश्रा इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति अपना रही हैं।योजनाओं में समयबद्धता और पारदर्शिता लाना, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा देना,और युवाओं की कौशल विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित करना।कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा का अब तक का कार्यकाल दर्शाता है कि वे केवल “फाइलों के अफसर” नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर काम करने वाले नेतृत्वकर्ता हैं। उनकी प्रशासनिक प्रतिबद्धता, निर्णय लेने की क्षमता और संवेदनशीलता ने उन्हें बालोद के लोगों के बीच भरोसेमंद चेहरा बना दिया है। हालाँकि, आने वाले समय में उन्हें औद्योगिक निवेश, पर्यटन विकास और शिक्षा-स्वास्थ्य के उन्नत ढाँचे जैसे क्षेत्रों पर और अधिक ध्यान देना होगा, जिससे बालोद वाकई प्रदेश के अग्रणी जिलों में गिना जाए।


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