भाजपा प्रदेश कार्यालय का हाल : संगठन मंत्री मोबाइल में व्यस्त, देवतुल्य कहें जाने वाले कार्यकर्ता उपेक्षित।

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विकास नंद/ रायपुर/ (सर्वव्यापी)/

भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश कार्यालय, जिसे कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन और संवाद का प्रमुख केंद्र माना जाता है, इन दिनों उपेक्षा और अव्यवस्था का शिकार नजर आ रहा है। संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं की समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय कार्यालय मंत्री और सह कार्यालय मंत्री मोबाइल फोन में ही मशगूल दिखाई देते हैं।स्थिति यह रही कि दूरदराज जिलों से मिलने आए कार्यकर्ताओं को कार्यालय में बैठाकर करीब एक घंटे तक इंतजार कराया गया। इंतजार के बाद उन्हें केवल एक कप चाय नसीब हुई।

यह सब तब हो रहा है, जब भाजपा खुद को अनुशासन, कार्यकर्ता सम्मान और सेवा भाव पर आधारित संगठन बताती है।

मोबाइल में व्यस्त मंत्री और सह मंत्री की तस्वीरें इस लापरवाही की गवाही देती हैं। कार्यकर्ताओं की ओर ध्यान न देना, उनकी समस्याएं न सुनना और संगठन की गरिमा को नजरअंदाज करना – यह रवैया कार्यकर्ताओं में नाराजगी का कारण बन रहा है।

मीडिया ने जब इस मुद्दे पर सवाल उठाए और खबर प्रकाशित की, तो संबंधित पदाधिकारियों ने पत्रकारों को ही झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दे डाली। इस तरह का व्यवहार न केवल भाजपा की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि संगठन की साख को भी धूमिल करता है।

प्रश्न यह है कि जब भाजपा के प्रदेश कार्यालय में ही कार्यकर्ताओं को सम्मान और बुनियादी सुविधा नहीं मिल पा रही, तो आम जनता की समस्याओं को कितनी गंभीरता से लिया जाएगा?

क्या पार्टी कार्यकर्ताओं के त्याग और मेहनत को केवल चुनावी समय में ही याद करती है?

संगठन के मंत्री और सह मंत्री का यह आचरण भाजपा के अनुशासन और सेवा भाव के मूल मंत्र से कितना मेल खाता है, यह सवाल अब कार्यकर्ताओं के बीच गूंज रहा है।


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