छत्तीसगढ़िया हित या सियासी सैर?… मुख्यमंत्री बदलते रहे, विदेश यात्राओं का सिलसिला नहीं टूटा।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक परंपरा बन चुकी है कि जो भी मुख्यमंत्री बनते हैं, वह जनता के टैक्स के पैसों से विदेश यात्राएँ जरूर करते हैं। इसे हमेशा प्रदेश के विकास और निवेश बढ़ाने के नाम पर प्रस्तुत किया जाता है, लेकिन ज़मीनी हकीकत 25 साल के युवा छत्तीसगढ़ की जनता भली-भांति जानती है।पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से लेकर भूपेश बघेल और अब मौजूदा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक, हर सरकार ने अपने कार्यकाल में विदेश दौरों को प्रदेश हित बताने का दावा किया, मगर प्रदेश की तस्वीर आज भी बद से बदतर होती जा रही है। बेरोजगारी, पलायन, स्वास्थ्य, शिक्षा और किसानों की बदहाल स्थिति आज भी जस की तस है।सरकारें बदलती रहीं, लेकिन मंत्रियों और विधायकों ने हमेशा खुद को छत्तीसगढ़िया बताकर जनता का विश्वास जीतने की कोशिश की। सवाल यह उठता है कि जब यह सब नेता खुद को छत्तीसगढ़ का असली हितैषी बताते हैं, तो फिर आम छत्तीसगढ़िया की ज़मीनी समस्याओं पर सरकारें गंभीर क्यों नहीं दिखाई पड़तीं?वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी इस समय विदेश यात्रा पर हैं और इसे छत्तीसगढ़ के हित में बताया जा रहा है। लेकिन जनता के मन में बड़ा सवाल है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों की विदेश यात्राओं की तरह यह यात्रा भी केवल सियासी सैर बनकर रह जाएगी या वाकई छत्तीसगढ़ की तस्वीर बदलेगी?जनता अब यह जानने को उत्सुक है कि इन विदेश यात्राओं से छत्तीसगढ़ को ठोस फायदा कब मिलेगा, या फिर यह परंपरा सिर्फ सत्ता और सियासत के शौक तक सीमित रह जाएगी।


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