विकास नंद/सर्वव्यापी/
(छत्तीसगढ़-ओडिशा सीमा) – कृषि और संस्कृति का अद्भुत संगम दिखाने वाले नवाखाई पर्व को सरायपाली क्षेत्र में गुरुवार को बड़े उत्साह और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने नई फसल भगवान को अर्पित कर समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
नवाखाई का अर्थ है “नए अन्न का सेवन”। खरीफ की पहली फसल को काटकर सबसे पहले देवी-देवताओं को अर्पित करने की परंपरा निभाई गई।
इसके बाद ग्रामीणों ने परिवार और समाज के साथ नई फसल से बने पकवानों का आनंद लिया।ग्रामीणों का कहना है कि यह पर्व प्रकृति, धरती माता, जल और सूर्य के प्रति आभार व्यक्त करने का अवसर है। वहीं सामाजिक दृष्टि से यह पर्व आपसी एकता और भाईचारे का प्रतीक है।
गांव-गांव में सामूहिक भोज, पारंपरिक नृत्य और गीतों से वातावरण आनंदमय रहा।धार्मिक रूप से इस पर्व को मां दुर्गा और ग्राम देवताओं को समर्पित किया जाता है। नई फसल का पहला अंश भगवान को अर्पित कर ही लोग उसका सेवन करते हैं।
सरायपाली में नवाखाई पर्व सिर्फ नई फसल के स्वागत का ही नहीं बल्कि खेती-किसानी, प्रकृति और परंपरा के प्रति सम्मान प्रकट करने का उत्सव बन गया।