संपादक के कलम से…नवाखाई पर्व: छत्तीसगढ़ी में समझावन।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

नवाखाई पर्व मुख्य रूप ले छत्तीसगढ़, ओड़िसा, झारखंड अऊ पूरबी मध्य भारत के दूसर इलाका मं मनाय जाथे।नवा अन्न (नवा + खाई) यानी नई फसल के खाय के दिन। ए पर्व खरीफ के पहली फसल (धान या दूसर अनाज) कटइया के बाद भगवान ला अर्पित करके, आभार प्रकट करे बर मनाय जाथे। ये इलाका के संस्कृति अऊ परंपरा खेती ऊपर आधारित आय, तेकर से नई फसल ला पहिली देवता ला अर्पित करके खाय के परंपरा रहिथे। किसान अऊ गांव वाला मन भगवान, धरती माता, पानी, सूरज अऊ प्रकृति के प्रति धन्यवाद देथे, जऊन मन अनाज उगाए मं मदद करिन। ए दिन परिवार अऊ गांव वाला संग संग नई फसल ले बने पकवान खाथें, नाच-गान करथें अऊ सामाजिक एकता देखाथें। एला देवी-देवता, खास करके मां दुर्गा अऊ ग्राम देवता ला समर्पित करे जाथे।नवाखाई पर्व ए खातिर मनाय जाथे ताकि नई फसल ला भगवान ला अर्पित करके, फेर मनखे ओकर उपयोग करय, अऊ खेती-किसानी अऊ प्रकृति के सम्मान देखाय जावय।


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