20 लोगो ने नेत्रदान की घोषणा की।

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तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/

नेत्र दान पखवाड़ा के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पदमपुर मुंगेली में नेत्रदान शिविर का आयोजन कर 55 लोगो के आॅख की जांच कर उन्हें नेत्र सुरक्षा, नेत्र जांच और नेत्रदान से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी गई। इसके साथ ही आवश्यक दवाईयां व चश्मा वितरित किया गया। इस अवसर पर 20 लोगो ने नेत्रदान करने की घोषणा की।

प्राथ. स्वास्थ्य केन्द्र पदमपुर में आयोजित नेत्रदान पखवाड़ा में लोगो का उत्साह दिखा। लगभग 60 मरीजों ने पखवाडा में उपस्थिति दी अपना स्वास्थ्य जांच कराया और उन्हें दवाई के साथ 7 लोगो को चश्मा दिया गया।

नेत्रदान पखवाड़ा को संबोधित करते हुए डां. मनीष बंजारा ने कहा कि नेत्र ईश्वर की अनुपम रचना है जिसके माध्यम से हम जीवन का आनंद लेते है। ईश्वर ने जब मनुष्य की रचना की तो उसने मनुष्य को दो महत्वपूर्ण चीजे दी जिनमें नेत्र व मस्तिष्क है जिसके सहारे मनुष्य अपनी मन चाही दिशा में आनंद प्राप्त कर जीवन जी सकता है। नेत्र व मस्तिष्क की स्थिति एक गाड़ी के दो पहियों जैसे है। जिसमें नेत्र के सहारे हम सारी चीजों को देखते है लेकिन उसके आनंद का आभास मस्तिष्क के माध्यम से हम लेते है और जीवन की दिशा मनुष्य के सोच के अनुसार मस्तिष्क तय करता है और आनंदपूर्वक जीवन जीता है। इस तरह नेत्र जीवन का महत्वपूर्ण अंग है उसके बगैर पूरी दुनिया अंधकारमय है। आज हम इस पखवाड़ा में नेत्र के बारे में आप को जानकारी देते हुए यह अपेक्षा रखते है कि आप अपने नेत्रों का ध्यान जरूर रखे। आंखों को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार लें, धूम्रपान से बचें, सूरज की हानिकारक किरणों से आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनें, स्क्रीन पर काम करते समय 20-20-20 नियम का पालन करें, पर्याप्त नींद लें और तकलीफ होने पर नियमित रूप से नेत्र चिकित्सक से आंखों की जांच कराएं। आज के इस डिजिटल युग में कम्प्यूटर, मोबाईल इस्तेमाल करने वाले लोगो को लम्बे समय तक इसका लगातार उपयोग न करे, बल्कि हर 20 मिनट में 20 सेकेंड का गेप जरूर लें और इस ब्रेक में 20 फीट की दूरी की चीज को 20 सेंकेड तक देखे। जिससे आपके आॅखों की थकान दूर होगी व धंुधली दृष्टि बनने से बचाव होगा। इसके साथ ही आप अपने स्तर पर भी आॅखों का व्यायाम कुछ इस तरह कर सकते है जिसमें अपने कमरे में चार पाइंट बना ले और इन बिन्दूओं को बिना चेहरा घुमाये आॅखों से उन बिन्दुओं को लगातार घड़ी के क्रम में दाहिने ओर घुमाते हुए पूरे चार पाइंट को जोड़ते हुए 5 मिनट तक देखे। उसके बाद इस व्यायाम को उल्टे क्रम से करे तत्तपश्चात आॅखांे को आराम दे। ताकि आपकी आॅख स्वस्थ रह सके। ईश्वर ने मनुष्य को नेत्र के रूप में जो अनुपम उपहार दिया है जिसके सहारे हम देख कर खुशनुमा जिंदगी जीते है। लेकिन आप कल्पना करिये जिसके आॅखों में रोशनी नहीं है उनके लिए पूरा दुनिया अंधकारमय है। लेकिन आज के इस उन्नत, आधुनिक विज्ञान के युग में हम जिनके आॅखों में रोशनी नहीं है उनके आॅखों को रोशन कर उन्हें नई जिंदगी की दिशा हम और आप दे सकते है। आज का नेत्रदान पखवाड़ा इसी विषय पर आधारित है। मैं आप सभी लोगो से अपील करता हूॅ कि आप नेत्रदान कर उन लोगो के जीवन में रोशनी ला सकते है जिनकी आॅखों में रोशनी नहीं है। मेरा मानना है कि नेत्रदान सभी दान से उत्तम दान है जिसके सहारे आप नेत्रदान कर दो व्यक्तियों के अंधकारमय जीवन से मुक्त कर, रोशनी देकर दुनिया की वह खुशी दे सकते है जो दूसरे दान से संभव नहीं है। नेत्रदान के संबंध में लोगो को भ्रांतियां रहती है कि नेत्रदान करने पर आॅख निकाल कर ले जायेगे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं है नेत्रदान की स्थिति में मृत्यु के उपरांत 6 घंटे के भीतर आॅंख के एक लेयर कार्निया जो एक झिल्ली के तरह होता है। उसे लिये जाता है न कि पूरा आॅख। नेत्रदान की प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में पूरी हो जाती है और शरीर में किसी प्रकार की विकृति नहीं होती। यह कार्निया झिल्ली जरूरतमंद दूसरे के आॅख में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है। जिससे उनकी आॅख रोशन होकर देखने आरंभ कर देती है। आप कल्पना करिये जिनका आॅख आपके नेत्रदान से रोशन हुआ है और दुनिया देख कर जितना खुश होंगे उससे ज्यादा आपको दुआ देगें। दूसरों की अंधकारमय दुनिया को रोशन करने के लिए राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा की स्थापना स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा 1985 में आरंभ हुई थी। तब से राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा हर साल 25 अगस्त से 8 सितंबर तक मनाया जाता है। इस अभियान का उद्देश्य जागरूकता पैदा करना और नेत्रदान को बढ़ावा देना है। ताकि रोशनी विहिन आॅखों को रोशन किया जा सके।

बता दे कि विश्व के कई देशों में नेत्रदान को अनिवार्य कर दिये जाने से वहां के देश के हर नागरिक नेत्रदान करना पड़ता है। जिनसे उन देशों में अंधत्व का प्रतिशत नगण्य होता है।

मैं पुनः आप सभी लोगो से अपील करता हूॅ कि आप सभी लोग नेत्रदान का संकल्प लेकर नेत्रदान में योगदान जरूर देवें। इस अपील से 20 लोगो ने नेत्रदान करने की घोषणा की जिसमें सेवानिवृत्त आर्मी, जनप्रतिनिधि, स्वास्थ्य कर्मचारी, अन्य विभाग के कर्मचारी के साथ ग्रामवासी शामिल है।

उल्लेखनीय है कि नेत्रदान के मामले में मुंगेली जिला काफी पीछे रहा है। इस बार के नेत्रदान पखवाडा में इसकी शुरूवात हुई और मुंगेली जिला सम्मान जनक स्थिति में पहंुच गया है। नेत्रदान पखवाडा का आयोजन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डां. शीला शाहा, डी.पी.एम. गिरीश कुर्रे व नोडल अधिकारी डां.देवेश खाण्डे के निर्देश एवं मार्गदर्शन में किया गया। इस अवसर पर गोविंद मोहले जनपद सदस्य, आशीष जायसवाल, मिश्री खांडे रिटायर्ड आर्मी, टोपेश साहू सचिव, संजय जायसवाल, वेद प्रकाश खांडे, अमन साहू, वेद प्रकाश खांडे, फेकू मिरि, अतुल जायसवाल, किशोर कुंभकार नेत्र सहायक, सीमा पहारी, मिथलेश राठौर, किशोर उइके नेत्र सहायक, सुनीता मिरि, सुधा लक्ष्मी गंधर्व, दिवाकर साहू, मोनिका जांगड़े, जलेश्वरी, ललिता साहू उपस्थित थे।


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