तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में मुख्य सचिव पद को लेकर पिछले तीन महीनों से कयासों का दौर जारी है। वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन का कार्यकाल सितंबर 2025 में समाप्त हो रहा है और उनके बाद किसे यह जिम्मेदारी मिलेगी, इसे लेकर प्रशासनिक गलियारों में चर्चा गर्म है। सूत्रों के अनुसार 1994 बैच के आईएएस अफसर विकास शील का नाम लगभग तय माना जा रहा है।
हालांकि इस निर्णय से कई वरिष्ठ आईएएस अफसरों के बीच असंतोष की स्थिति भी बन सकती है।वरिष्ठता के लिहाज से देखें तो 1991 बैच की रेणु पिल्ले, 1992 बैच के सुब्रत साहू, 1993 बैच के अमित अग्रवाल और 1994 बैच के ही मनोज कुमार पिंगुआ तथा ऋचा शर्मा, निधि छिब्बर दावेदारों में शामिल हैं। इनमें रेणु पिल्ले सबसे सीनियर हैं और लंबे समय से छत्तीसगढ़ में विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं। सुब्रत साहू भी राज्य प्रशासन में बेहद अहम माने जाते हैं, जिन्होंने कई बड़े चुनाव और विभागीय जिम्मेदारियाँ संभाली हैं। अमित अग्रवाल वर्तमान में केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। वहीं मनोज पिंगुआ और ऋचा शर्मा भी 1994 बैच के अफसर हैं और राज्य सरकार में अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
ऐसे में विकास शील का नाम आगे आने से वरिष्ठ अफसरों में नाराजगी स्वाभाविक मानी जा रही है।
अफसरशाही में प्रायः वरिष्ठता को महत्व दिया जाता है और जब जूनियर अधिकारी को शीर्ष पद पर पदोन्नत किया जाता है तो सीनियर अधिकारियों का मनोबल प्रभावित होता है। हालांकि सरकार के पास यह तर्क होता है कि मुख्य सचिव पद के चयन में केवल बैच या वरिष्ठता ही नहीं, बल्कि कार्य क्षमता, प्रशासनिक दक्षता और राजनीतिक संतुलन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पिछले समय में भी ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब राज्य सरकारों ने वरिष्ठ अफसरों को दरकिनार कर अपेक्षाकृत जूनियर अफसर को मुख्य सचिव नियुक्त किया है।
अदालतें भी यह कह चुकी हैं कि सरकार को अपने हिसाब से मुख्य सचिव चुनने का अधिकार है, बशर्ते निर्णय मनमाना न हो और उसके पीछे प्रशासनिक तर्कसंगतता हो।
यही कारण है कि सरकार यदि विकास शील की नियुक्ति करती है, तो संभव है कि आधिकारिक तौर पर वरिष्ठ अधिकारी आपत्ति दर्ज न कराएं, लेकिन अंदरूनी असंतोष से इंकार नहीं किया जा सकता।
अब सबकी निगाहें सितंबर के अंतिम सप्ताह पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि छत्तीसगढ़ का नया मुख्य सचिव कौन होगा।
यदि विकास शील का नाम आधिकारिक रूप से घोषित होता है, तो यह छत्तीसगढ़ प्रशासनिक सेवा में एक और बड़ा उदाहरण होगा, जहाँ वरिष्ठता से ज्यादा महत्व राजनीतिक भरोसे और प्रशासनिक संतुलन को दिया गया।