तरुण कौशिक/ संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ में सत्ता के भीतर का गणित एक बार फिर सियासी तकरार में बदलता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जहां नवरात्रि पर्व के मौके पर निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड, संसदीय सचिवों और सलाहकारों की नियुक्तियों के जरिए राजनीतिक संतुलन साधने के मूड में बताए जा रहे हैं, वहीं वित्त मंत्री ओमप्रकाश चौधरी ने इस पूरी कवायद पर ही ‘फाइनेंशियल रेड कार्ड’ दिखा दिया है।
प्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि पूर्व कलेक्टर वर्तमान वित्त मंत्री ओमप्रकाश चौधरी का कहना है कि सरकार पहले ही महतारी वंदन योजना के लिए 500 करोड़ रुपये आवंटित कर चुकी है, ऐसे में नए पदों पर नियुक्ति करना राज्य को आर्थिक संकट की ओर धकेल देगा। उनकी दलील है कि फिजूलखर्ची रोकनी होगी, वरना योजनाओं पर ताले लग जाएंगे।लेकिन राजनीति का समीकरण महज वित्तीय आंकड़ों से नहीं चलता। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि यदि इस नवरात्रि पर्व पर नियुक्तियां नहीं हुईं, तो कार्यकर्ताओं और संगठन की नाराजगी का खामियाजा पार्टी को अगले विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
नेताओं ने यहां तक कह दिया कि चाहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दर्जनों सभाएं करवा ली जाएं, अगर नियुक्तियों का ‘प्रसाद’ कार्यकर्ताओं को नहीं मिला, तो जनता भी आशीर्वाद देने से चूक जाएगी।
यानी एक तरफ वित्त मंत्री ओमप्रकाश चौधरी हिसाब-किताब का रजिस्टर थामे हैं, तो दूसरी तरफ संगठन चुनावी गणित का एजेंडा लेकर खड़ा है।
सवाल यही है कि नवरात्रि पर सरकार आशीर्वाद बांट पाएगी या फिर 500 करोड़ की दुहाई में उलझकर सत्ता की ‘आरती’ ही थम जाएगी।