तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय किस रणनीति के सहारे अपनी सरकार की साख को मजबूत कर पाएंगे और 2028 में दोबारा सत्ता की राह आसान बना पाएंगे। सत्ता संभाले कुछ ही महीनों में यह साफ़ नज़र आने लगा है कि सरकार को संगठन से लेकर प्रशासन तक, और जनता से लेकर नेताओं तक हर स्तर पर नई कसौटियों पर खुद को खरा साबित करना होगा।वहीं राजनीतिक जानकार मानते हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों में भरोसेमंद अफसरों और राजनीतिक सलाहकारों की मजबूत टीम खड़ी की थी। यही कारण रहा कि उनके निर्णयों में स्थिरता और प्रशासनिक अमल में तेजी दिखती थी। दूसरी ओर, विष्णु देव साय के सामने अभी भी भरोसेमंद टीम तैयार करने की चुनौती है। मुख्यमंत्री सचिवालय में बैठे कुछ अफसरों पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में, अगर साय सरकार अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है, तो सबसे पहले उन्हें मुख्यमंत्री कार्यालय और मंत्रालय में नई ऊर्जा भरनी होगी।मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह को इस समय सरकार की सबसे बड़ी ताक़त माना जा रहा है। उन्होंने मंत्रालय की परंपरागत ढर्रे वाली कार्यशैली को तोड़ते हुए अधिकारियों की कड़ी क्लास लेना शुरू किया है। न केवल वे मंत्रालय की फाइलों पर पैनी निगाह रखे हुए हैं, बल्कि आम जनता से सीधे मुलाकात कर सरकारी योजनाओं के जमीनी असर का आकलन कर रहे हैं। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि अगर सरकार की छवि को सकारात्मक मोड़ देना है तो सुबोध कुमार सिंह की सक्रियता को और व्यापक दायरे में ले जाना होगा।हालांकि, साय सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी उसके अपने ही जनप्रतिनिधि और मंत्री साबित हो रहे हैं। जनता और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कई मंत्री न तो अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभा रहे हैं और न ही जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। इससे सरकार की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वे अपने मंत्रियों को स्पष्ट संदेश दें कि जनता और भाजपा कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान करना ही उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।वहीं जमीनी स्तर पर भी प्रशासनिक कसावट लाने की सख्त ज़रूरत है। पंचायतों से लेकर जिला स्तर तक आम जनता की समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा है। इससे जनता में असंतोष फैल रहा है। यदि सरकार इस असंतोष को समय रहते दूर नहीं करती, तो विपक्ष को बड़ा राजनीतिक हथियार मिल सकता है।भाजपाइयों का कहना है कि विष्णु देव साय को अब निर्णायक फैसले लेने होंगे। पहला, भरोसेमंद अफसरों और सलाहकारों की टीम बनाकर प्रशासनिक मशीनरी को धार देना। दूसरा, निष्क्रिय मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को स्पष्ट चेतावनी देना। और तीसरा, जनता के बीच सीधा संवाद बढ़ाकर विश्वास कायम करना। अगर मुख्यमंत्री इन मोर्चों पर समय रहते सख्ती और दूरदर्शिता दिखाते हैं, तो उनकी सरकार की छवि न केवल सुधर सकती है बल्कि भाजपा के लिए आगामी चुनाव में जीत की राह भी आसान हो सकती है। लेकिन यदि हालात को यूं ही ढीला छोड़ दिया गया, तो यह सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी साबित होगी।