विकास और सुबोध- छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार की साख बचाने वाले अंतिम मोर्चे पर। - Sarvavyapi विकास और सुबोध- छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार की साख बचाने वाले अंतिम मोर्चे पर। - Sarvavyapi

विकास और सुबोध- छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार की साख बचाने वाले अंतिम मोर्चे पर।

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तरुण कौशिक/संपादक सर्वव्यापी/

छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में फिलहाल तनाव की स्थिति है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कार्यकाल में जनता और संगठन दोनों तरफ से असंतोष की आवाजें तेज़ हो रही हैं। भाजपा संगठन के वरिष्ठ नेता, विधायक और सांसद भी सरकार की गति और प्रशासनिक फैसलों से संतुष्ट नहीं हैं। इस बीच, केंद्र सरकार ने दो ऐसे अफसरों को राज्य की साख बचाने की बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है, जिनकी नियुक्ति ने राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह अब छत्तीसगढ़ सरकार के “अंतिम सहारे” बन गए हैं। इन दोनों अफसरों के ऊपर ही यह जिम्मेदारी है कि मुख्यमंत्री के कार्यकाल की छवि सुधारी जाए, संगठन और जनता दोनों के विश्वास को बहाल किया जाए, और प्रशासनिक कार्यशैली में सुधार लाया जाए।राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि यदि ये दोनों अफसर समय पर निर्णायक कदम नहीं उठाते हैं, तो मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के सामने गहरी संकट की स्थिति खड़ी हो सकती है। भाजपा के अंदरूनी समीक्षाओं में भी संकेत मिल रहे हैं कि संगठन के बड़े नेता नाखुश हैं, और जनता में नाराजगी भी तेजी से बढ़ रही है।लोगों का मानना है कि विकास शील और सुबोध कुमार सिंह की कार्यशैली ही तय करेगी कि सरकार की साख बचेगी या नहीं। उनका हर कदम, हर निर्णय अब प्रदेश की राजनीतिक स्थिरता और भाजपा की छवि के लिए निर्णायक है। यह ऐसा मोड़ है जहाँ अफसरों की क्षमता और नीतिगत समझ सीधे जनता और संगठन के विश्वास से जुड़ रही है। यदि ये दोनों अफसर अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक असफलता नहीं होगी। यह राज्य की सत्ता और संगठनात्मक संतुलन पर भी गहरा असर डालेगी। इसलिए फिलहाल छत्तीसगढ़ की निगाहें पूरी तरह विकास शील और सुबोध कुमार सिंह पर टिकी हुई हैं।


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